दो साल का किराया हड़पने वाले आरोपित को एक वर्ष का कारावास।

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संवादसूत्र देहरादून/ऋषिकेश: दुकान के किराये की कूटरचित रसीद तैयार कर दो वर्ष का किराया हड़प कर धोखाधड़ी करने वाले आरोपित को न्यायालय ने एक वर्ष कारावास तथा पंद्रह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
इस मामले में मायाकुंड स्थित केवलानंद आश्रम के स्वामी दिगंबर अवस्थानंद पुरी ने आश्रम की दुकान पर किरायेदार के रूप में रहने वाले विकास कुमार गोयल के खिलाफ 17 अप्रैल 2015 को वाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया कि वह केवलानंद आश्रम के कानून स्वामी व लैडलार्ड है। उनके आश्रम के बाहर बनी दुकान पर विकास कुमार गोयल किरायेदार के रूप में रहता है। आरोप है कि विकास कुमार गोयल ने उन्हें दो वर्ष तक किराया नहीं दिया, जब उन्होंने किराया मांगा तो आरोपित विाकास कुमार ने 31 हजार रुपये किराया के रूप में चुकाने की एक कूटरचित रसीद तैयार की। इस रसीद दिवंगबर अवस्थानंद पुरी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। इतना ही नहीं जो कूटरचित रसीद पेश की गई, वह आश्रम की ओर से जारी किए जाने वाली रसीद के प्रारूप से अलग थी।
जिस पर आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना करने तथा कूटरचित दस्तावेज को छल करने के लिए इस्तेमाल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मामला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भवदीप रावते की अदालत में विचाराधीन था। बुधवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋषिकेश भवदीप रावते की अदालत ने आरोपित विकास कुमार गोयल को संबंधित धाराओं में दोषी पाते हुए उसे सजा सुनाई। न्यायालय ने विकास कुमार गोयल को धारा 420 में एक वर्ष कारावास तथा पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 468 में एक वर्ष कारावास तथा पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 468 में भी एक वर्ष के कारावास तथा पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय के मुताबिक सभी धाराओं में कारावास की सजा एक साथ चलेगी। जबकि अर्थदंड की पंद्रह हजार रुपये में से दस हजार रुपये प्रतिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में देय होगा। जबकि शेष पांच हजार रुपये सरकार के पक्ष में जमा किए जाएंगे।

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