विधानसभा बैकडोर नियुक्ति: नियमों के तहत उनके द्वारा नियुक्तियों को खारिज किया गया: ऋतु खंडूड़ी।

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संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में बैकडोर से नियुक्ति पाए कर्मचारियों को,जहां विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था,वही नौकरी चले जाने को लेकर कोर्ट पहुंचे तदर्थ कर्मचारियों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले कुछ चुनौती देते हुए स्टे लेकर आ गए,जिसके चलते अब कर्मचारियों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन फिर भी इसको लेकर सियासत देखने को मिल रही है।

आखिर जिन कर्मचारियों को विधानसभा से बाहर का रास्ता विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा दिखा दिया गया था उन्हें अब फिर से विधानसभा में नियुक्ति दी जा रही है दरअसल जिन तदर्थ कर्मचारियों को विधानसभा अध्यक्ष ने कमेटी की सिफारिश पर बाहर का रास्ता दिखा दिया था वही कर्मचारी विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंचे और कोर्ट से विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर स्टे लेकर आए,जिसके चलते अब 228 कर्मचारियों को विधानसभा में फिर से नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है पहले दिन 82 कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई है। कोर्ट से जो स्टे कर्मचारियों को मिला है, उससे विपक्ष सरकार के साथ विधानसभा अध्यक्ष पर भी सवाल उठा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा केवल सुर्खियां बटोरने को लेकर यह कार्यवाही की गई थी हकीकत में अगर कार्रवाई सरकार या विधानसभा को करनी होती तो जो नियुक्ति पत्र से हटाने को लेकर पत्र कर्मचारियों को दिया गया उसमें जनहित का जिक्र ना होता।

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कोर्ट से स्टे मिलने के बाद जहां विधानसभा के द्वारा तदर्थ कर्मचारियों को फिर से नियुक्ति दी जा रही है तो वहीं विपक्ष सरकार विधानसभा की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं लेकिन जिस तरीके से आरोप विपक्ष विधानसभा अध्यक्ष पर टीआरपी बटोरने को लेकर उठा रहा है उसको लेकर विधानसभा अध्यक्ष बेहद गुस्से में नजर आए उनका कहना है कि जिसने भी यह बयान दिया है उनसे वह कहना चाहती है कि नियमों के तहत उनके द्वारा नियुक्तियों को खारिज किया गया था। और जो फैसला उन्होंने लिया वह नियम कानूनों के तहत ही लिया था।

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उत्तराखंड विधानसभा में बैक डोर से नियुक्ति पाई नेताओं के करीबियों को नौकरी मिलने को लेकर खूब मामला गरमाया था लेकिन अब जिस तरीके से भाजपा हो या कांग्रेस के नेताओं के करीबियों को कोर्ट से राहत मिली है उसको लेकर भी सियासत देखने को मिल रही है लेकिन ऐसे में देखना यही होगा कि आखिरकार जब हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी होगी और हाई कोर्ट अपना फाइनल डिसीजन सुनाएगा तो क्या कुछ बैक डोर से नियुक्ति पाए कर्मचारियों के भविष्य को लेकर फैसला आता है।