उत्तराखण्ड
मातृभूमि का श्रृंगार करता है राष्ट्रीयगीत ‘वंदे मातरम्’ का एक-दो शब्द: डॉ बिजल्वाण।
संविधान दिवस समारोह


संवादसूत्र देहरादून: श्री गुरु राम लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय, देहरादून में संविधान दिवस शासकीय प्रोटोकॉल के अनुसार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सामूहिक राष्ट्रियगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन द्वारा किया गया। इस अवसर पर अतिथि श्री सुबोधन शर्मा (पूर्व सैनिक एवं समाजसेवी) उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम में आधुनिक विभाग के आचार्य श्री दीपक बहुगुणा ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन द्वारा संविधान दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान स्वीकार किया गया था और यह 26 जनवरी 1950 को पूर्णतः लागू किया गया। उन्होंने संविधान को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए इसके संरक्षण एवं सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के छात्रों ने देशभक्ति गीत, कविताएँ, भाषण तथा अनेक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रभावना का अद्भुत प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी लोगों में ऊर्जा एवं देशभक्ति की भावना का संचार किया। अतिथि सुबोधन शर्मा जी ने भी छात्रों को सेना के शौर्य एवं पराक्रम के विषय में जानकारी देते हुए सेना के प्रति अपनी निष्ठा एवं प्रतिबद्धत्ता व्यक्त की ।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य महोदय डॉ राम भूषण बिजल्वाण ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रियगीत ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास, इसकी रचना, उद्देश्य तथा राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में इसकी भूमिका के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने छात्रों से संविधान में निहित मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान भी किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के आचार्यगण डॉ. शैलेन्द्र डंगवाल (नव्य व्याकरण विभागाध्यक्ष) एवं डॉ. सीमा बिजल्वाण (हिंदी विभागाध्यक्षा) सहित अन्य शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच-संचालन साहित्य संकाय के आचार्य डॉ. सतीश नौटियाल ने उत्कृष्ट रूप से किया। उन्होंने संविधान की महत्ता और इसके पालन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम को रोचक एवं सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम की सम्पूर्ति शांति पाठ व मिष्ठान वितरण के साथ हुई। संविधान दिवस का यह आयोजन अत्यंत सफल, प्रेरक एवं ज्ञानवर्धक रहा, जिसने विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, कर्तव्यभाव और संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा को और सुदृढ़ किया।




