“ज्योति बनी प्रेरणा”,एक उम्मीद पलायन रोकने की ।

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चमोली/नारायणबगड़ / बगोली : जी हाँ कहते हैं न स्त्री चाहे तो कुछ भी संभव है और विपरीत परिस्थिति में उसके जज्बे को अकसर देखा जाता रहा है,, और अगर बात पहाड़ की स्त्रियों की हो तो कोई शक की नहीं कि उसमें किसी हौंसले कि कमी हो,, बिलकुल जहाँ एक और उत्तराखंड के युवा एवं परिवार रोजगार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य आदि के लिए पहाड़ों से पलायन कर रहे हैं इन सभी के बीच जिला चमोली के तहसील कर्णप्रयाग में नारायण बगड गांव की ज्योति बिष्ट ने एक नई मिसाल कायम की है…

साथ ही इस कार्य में ज्योति बिष्ट को उनके पति द्वारा पूरा प्रोत्साहन मिला, ज्योति के पति शंकर सिंह बिष्ट भी हमेशा से गांव के धार्मिक और सामजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं ,, और साथ ही मर्चेंट नेवी में नौकरी भी करते हैं वह चाहते तो वह भी अन्य युवाओं की तरह अपने बच्चों की पढ़ाई एवं रोजगार का रोना रोकर पहाड़ों से पलायन कर सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी अच्छी सोच को रखते हुए ना तो कभी पहाड़ो से पलायन करने के बारे में सोचा और ना ही कभी अपने बच्चों को साथ में ले जाने के बारे में सोचा… उन्होंने उसके विपरीत गांव में रहकर ही रोजगार के नए आयाम शुरू किए और कुटीर उद्योग के तहत उन्होंने अपनी पत्नी के लिए गांव में ही रोजगार की व्यवस्था की.. जो कि मात्र 40 -50 हजार ₹ में शुरू हुआ है, जी हां ज्योति बिष्ट आजकल अपने ही घर पर रहकर आटा, चावल, मसाले इत्यादि की चक्की चलाती हैं.. जिससे की महीने की 15 से 20 हजार रूपये तक की आमदनी उनकी आसानी से हो जाती है और उनका प्रयास है कि अन्य ग्राम वासी भी ऐसे कामों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें और ऐसे काम सीखें.. जो कि आप घर के अन्य कामों को निपटाने के साथ-साथ अपने बच्चे की देखभाल भी घर पर रह कर आसानी से कर सकते हैं अभी उनका भविष्य का प्लान है कि आने वाले दिनों में वह जंगली जडी बुटियों की जानकारी और बीमारी में उनका इस्तेमाल करना और मशरूम की खेती करना, मधुमक्खी पालन आदि काम गांव वालों को सिखाएंगे,उसके लिए पॉलीहाउस और कैसी कंडीशन होती है इसके बारे में भी वह गांव वालों को बताएंगे और खुद इन कामों के लिए आगे आएंगे…
बगोली निवासी दीपक बिष्ट का कहना है ज्योति गांव की अन्य महिलाओं के लिये प्रेरणा बन गई हैं,, अन्य गांव वासी भी चाहते कि वो भी अपने गांव में रहकर इसी तरह का अपना ब्यवसाय करें जिससे पलायन को रोका जा सके,,क्यूंकि आज पहाड़ों से पलायन एक विस्फोटक रूप लेती जा रही है,,, इस तरह के प्रयास युवाओं को भविष्य में अपने पहाड़ से जोड़े रखने में सहायक होंगे….

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