रेलवे भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को हाई कोर्ट से राहत नहीं।

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संवादसूत्र देहरादून/नैनीताल: हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने बुधवार को हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर काबिज अतिक्रमणकारियों की ओर से दायर पांच जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। कोर्ट ने उन्हें कोई राहत न देते हुए मुख्य मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की अगुवाई वाली खंडपीठ को भेज दिया। इससे पहले 10 जून को कोर्ट ने अतिक्रमणकारियों के पक्षकार बनाने और राहत देने वाले प्रार्थना पत्रों को रिकार्ड में लेते हुए अंतिम सुनवाई में शामिल करने का निर्णया लिया था। ऐसे में उम्मीद थी कि उन्हें कार्रवाई से राहत मिल सकती है। लेकिन बुधवार को ऐसा कुछ नहीं हुआ।

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रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर काबिज मुस्तफा हुसैन, मोहम्मद गुफरान, टीकाराम पांडे, मदरसा गुसाईं गरीब नवाज व भूपेन्द्र आर्य की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने अतिक्रमण हटाने के लिए गौलापार में चिह्निकरण कर लिया है। उन्हें हटाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। ऐसे में उन्हें राहत मिलनी चाहिए।
मामला नौ नवंबर 2016 का है। तब हाई कोर्ट ने हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 सप्ताह में रेलवे की 29 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। कोर्ट ने कहा था कि जितने भी अतिक्रमणकारी हैं, उनको रेलवे पीपी एक्ट (सरकारी जमीन से बेदखली) के तहत नोटिस देकर जनसुनवाई करे। हाई कोर्ट के आदेश पर यहां के करीब 4365 परिवारों को नोटिस दिया गया, जिनकी रेलवे ने सुनवाई पूरी कर ली। किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध दस्तावेज नहीं मिले। दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे के विस्तार को देखते हुए रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण कर पटरी के आसपास रहने वालों को दो सप्ताह और उसके बाहर रहने वाले लोगों को छह सप्ताह के भीतर नोटिस देकर हटाने का आदेश पारित किया था।

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