जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग।

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संवादसूत्र देहरादून/ रुद्रप्रयाग: जिला पंचायत अध्यक्ष अमरदेई शाह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से संबंधित शपथ पत्र 14 सदस्यों ने डीएम को सौंपा है। साथ ही दावा किया है कि 3 ओर सदस्य भी उनके साथ हैं। जिला पंचायत में कुल 18 सदस्य है, असंतुष्टों ने 17 सदस्यो के विरोध में होने की बात कही है।
शनिवार रात लगभग साढ़े आठ बजे जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमंत तिवारी के नेतृत्व में 14 सदस्यों ने हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्र सौंप कर जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की है। शपथ पत्र में सभी 14 सदस्यों को हस्ताक्षर हैं। जिला पंचायत सदस्य गणेश तिवारी ने कहा कि इसमें चार बीजेपी के सदस्य शामिल हैं, जबकि कुल 18 में से 17 सदस्य अध्यक्ष के खिलाफ हैं। तीन अन्य सदस्यों के भी हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्र डीएम को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन से चार दिन के भीतर जिलाधिकारी को अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमंत तिवारी ने बताया कि जिले में काफी समय से अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदस्य मन बना रहे थे। शनिवार रात्रि करीब साढ़े आठ बजे 14 असंस्तुष्ट सदस्यों ने डीएम मयूर दीक्षित से भेंट कर जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अवश्िवास प्रस्ताव लाने का ज्ञापन सौंपा। इसमें जिला पंचायत सदस्य सविता भंडारी, रीना बिष्ट, भूपेन्द्र लाल, मंजू सेमवाल भाजपा के अधिकृत सदस्य हैं। जबकि वह स्वयं जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुंमत तिवारी, बबीता देवी, गणेश तिवारी, विनोद राणा, रेखा देवी, कुसुम देवी, कुलदीप सिंुह, नरेन्द्र सिंह बिष्ट, ने भी शपथ पत्र पर हस्ताक्षर है। अन्य दो जिला पंचायत सदस्यों के भी हस्ताक्ष हैं।
ज्ञापन में सदस्यों ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष मनमनी कर रही हैं। सदस्यों के बताए बिना ही महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। हाल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्तियां की गई, जिसकी जानकारी सदस्यों को नही है। यात्रा व्यवस्थाओं में में घोड़े खच्चर कीं गददी के कार्य को लेकर अनुमोदन नहीं किया गया। निवििदा के बिना ही कार्य एक व्यक्ति को सौंपा गया। इसके साथ ही राजकीय वाहन प्रयोग अपने निजी कार्यो के लिए किया जा रहा है। जिला पंचायत सदस्यों ने सोनप्रयाग में बिना किसी सूचना के पार्किग में एक व्यक्ति को बिस्तर लगाने की अनुमति दी।जबकि स्थानीय जिला पंचायत सदस्य को इसकी कोई सूचना नहीं थी।

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