विवेकाधीन कोष से मतदाताओं को रकम बांटने के आरोप में हाई कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री को जारी किया नोटिस।

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संवादसूत्र देहरादून/नैनीताल: हाई कोर्ट ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व वर्तमान वित्त मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल के निर्वाचन को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की। इसमें विवेकाधीन राहत कोष से रकम निकालकर मतदाताओं को बांटने का आरोप है। कोर्ट ने मंत्री अग्रवाल के साथ ही डीएम देहरादून, एसडीएम व रिटर्निंग आफिसर ऋषिकेश, मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड और ऋषिकेश सीट से सभी हारे हुए प्रत्याशी अनूप सिंह राणा, कदम सिंह बालियान, कनक धनै, जगजीत सिंह, बबली देवी, मोहन सिंह, राजे सिंह नेगी, संजय श्रीवास्तव, ऊषा रावत व संदीप बसनैत को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है । साथ ही भारत निर्वाचन आयोग से भी जवाब पेश करने को कहा है। अगली सुनवाई 25 मई को होगी।
सोमवार को वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में ऋषिकेश निवासी व कांग्रेस के प्रत्याशी रहे जयेंद्र चंद्र रमोला की चुनाव याचिका पर सुनवाई हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेम चंद्र अग्रवाल ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के विवेकाधीन राहत कोष से करीब पांच करोड़ रुपया निकाला गया।जिसकी स्वीकृति विधानसभा सचिव की ओर से दी गई। यह रकम डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से अपनी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं में बांटी है। डिमांड ड्राफ्ट 4975 रुपये के बनाए गए। जिनमें तीन फरवरी व नौ फरवरी की तिथि डाली गई है। डिमांड ड्राफ्ट साक्ष्य के तौर पर याचिका के साथ लगाए गए हैं। याचिका में इस मामले की जांच करने व आरोप सही पाए जाने पर अग्रवाल का निर्वाचन निरस्त करने की याचना की गई है।

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