विकास की दौड़ में मानव सभ्यता को खतरा

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पर्यावरण से छेड़छाड का नतीजा है इस तरह की आपदा आना – जोशी ।
हिमालयी राज्यो को साथ लेकर नीति बनाए केंद्र सरकार ।

देहरादून: चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय प्रवक्ता व कांग्रेस नेता महेश जोशी ने तपोवन में कल की घटना पर दुख व्यक्त किया और प्रभावितों व अपनी जान गंवा चुके व्यक्तियों के परिवार के प्रति गम्भीर संवेदना व्यक्त की ।
उन्होंने कहा कि अभी उत्तराखण्ड केदारनाथ आपदा से उभरा भी न था कि एक और आपदा आ गई । वो तो परमात्मा का शुक्र दिन के वक़्त ये घटना हुई और सतर्क होने का समय मिल गया जिससे संभलने का मौका मिल गया और जान माल की क्षति सीमित हो गई ।
उन्होंने कहा कि पहाड़ का व्यक्ति पर्यावरणीय दृष्टि से इसकी रक्षा व इसके कुप्रभावों से भली भांति परिचित है और पर्यावरण की रक्षा को सचेत करता रहता है । पहाड़ के लोगों ने वनों की रक्षा को चिपको जैसे आंदोलन किए जिसकी विश्व स्तर पर काफी सराहा गया ।
चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी के गांव रैणी में ग्लेशियर के फटने से आया सैलाब । गौरा देवी ने पर्यावरण से छेड़ छाड़ के कुप्रभावों के प्रति चेताया था ।
पर्यावरण से छेड़ छाड़ का नतीजा है जो विकास की दौड़ में मानव सभ्यता को खतरा है ।
ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियरों के लगातार पिघलने ये आपदा आई ।
सात साल पहले केदारनाथ की भयंकर आपदा के बाद भी हम न चेते ।
हिमालय का यह भूभाग संवेदनशील है जिसमें बड़े प्रोजेक्ट से खतरा है ।
अभी भी न चेते तो इस तरह की आपदा आती रहेगी ।
आज हम सबकी जिम्मेवारी है कि प्रकृति के कोप भाजन से सृष्टि की रक्षा करें । इसके लिए केंद्र सरकार की पहल कर नीति व विशेष पैकेज की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे पर्यावरण की रक्षा की जा सके।

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