शेरवुड कालेज के प्रधानाचार्य की सजा पर रोक।

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संवादसूत्र देहरादून/नैनीताल : जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी की अदालत ने नौवीं के छात्र की लापरवाही से मौत मामले में शेरवुड कालेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू की दो साल की सजा पर शुक्रवार को रोक लगा दी। न्यायालय ने 50 हजार जुर्माने की राशि पर भी स्थगनादेश पारित किया।
नवंबर 2014 में शेरवुड कालेज में नौवीं के छात्र शान प्रजापति निवासी काठमांडू, नेपाल की तबीयत बिगड़ गई थी। उसे बीडी पांडे अस्पताल, फिर हल्द्वानी के निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया। लेकिन रास्ते में ही शान ने दम तोड़ दिया। इस मामले में शान की मां नीना श्रेष्ठ की ओर से तल्लीताल थाने में प्रधानाचार्य अमनदीप संधू, वार्डन रवि कुमार व सिस्टर पायल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध धारा-304 ए आइपीसी के तहत चार्जशीट दाखिल किया। अभियोजन की ओर से 15 गवाह पेश किए गए। अभियोजन व बचाव पक्ष की दलील सुनने व गवाह के बयानों के आधार पर 29 जून 2022 को सीजेएम रमेश सिंह की कोर्ट ने प्रधानाचार्य समेत तीनों को दोषी करार देते हुए दो-दो साल की कैद व 50-50 हजार जुर्माने की सजा सुना दी। सीआरपीसी में तीन साल से कम सजा पर अंतरिम जमानत के प्रविधान के आधार पर कोर्ट ने तीनों को जमानत पर रिहा कर दिया। वहीं, सीजेएम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की। कोर्ट ने शुक्रवार को मामले को सुनने के बाद सीजेएम कोर्ट की ओर से दी गई दो साल की सजा पर रोक लगाने के साथ ही 50 हजार जुर्माने पर भी स्थगनादेश दे दिया।

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