बीकेटीसी की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील हैं: अजेंद्र अजय।

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संवादसूत्र देहरादून: बद्रीकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि उनके द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक कार्यक्रम कुछ लोगों को रास नहीं आ रहे हैं। बीकेटीसी की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के चलते कुछ लोगों के व्यक्तिगत स्वार्थों पर चोट पहुँची है। लिहाजा, ऐसे लोग लगातार उनको लक्ष्य बनाकर अनाप-शनाप आरोप लगा रहे हैं और उनकी व्यक्तिगत छवि खराब करने का दुष्प्रयास कर रहे हैं।

अजेंद्र ने कहा कि उन्होंने बीकेटीसी के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के पश्चात लगातार कई नई पहल शुरू की हैं। बीकेटीसी के गेस्ट हाउस में प्रबंधन कार्य देखने वाले कार्मिकों को प्रबंधकीय कार्य में दक्ष बनाने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर के पर्यटन विभाग से रिफ्रेशर कोर्स कराया। वर्षों से वेतन विसंगति का सामना कर रहे 130 से अधिक कार्मिकों की वेतन बढ़ोत्तरी की। पदोन्नति के लंबित मामलों का शीघ्रता से निबटारा कर कर्मचारियों/अधिकारियों की वर्षों की मुराद पूरी की।

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उन्होंने बताया कि बीकेटीसी में कुछ मामलों को अपवादस्वरूप छोड़ दिया जाए तो आज तक कभी कार्मिकों के
स्थानांतरण नहीं हुए थे। उन्होंने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए बीकेटीसी में पहली बार स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की। फिजूलखर्ची को रोकने के लिए देहरादून स्थित कैंप कार्यालय और ऋषिकेश स्थित प्रचार कार्यालय को समाप्त किया। इन दोनों कार्यालयों में तैनात कार्मिकों को उनकी उपयोगिता के अनुरूप स्थानांतरित किया गया।

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उन्होंने बताया कि बीकेटीसी की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए वे निरंतर प्रयत्नशील हैं। बीकेटीसी में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितताएं ना हो, इसे रोकने के लिए उन्होंने प्रदेश सरकार को वित्त नियंत्रक की नियुक्ति के लिए पत्र लिखा है। शासन उनके पत्र पर गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है और उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक बीकेटीसी में वित्त नियंत्रक की नियुक्ति हो जाएगी।

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उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व बीकेटीसी में सुधारवादी पहल नहीं चाहते हैं, ताकि उनके स्वार्थों की पूर्ति में किसी प्रकार की बाधा पैदा ना हो।उन्होंने कहा कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह को स्वर्णमंडित करने का कार्य ऐतिहासिक है। इससे गर्भगृह की अलौकिक छटा दिखाई पड़ रही है। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया के श्रद्धालु स्वर्णमयी गर्भगृह के दर्शन कर अभिभूत हैं। लिहाजा, कुछ विघ्न संतोषियों को यह रास नहीं आ रहा है और वे अनाप – शनाप की बातों को उठाकर दुष्प्रचार कर रहे हैं।