जून से शुरू होगी आदि कैलास यात्रा,श्रद्धालु कर पाएंगे ऊं पर्वत के दर्शन।

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संवादसूत्र देहरादून/पिथौरागढ़: लगातार कोरोना के कारण दो साल से बंद रही आदि कैलास यात्रा इस साल जून से शुरू होगी। यह यात्रा पूरी तरह भारतीय क्षेत्र में ही कराई जाएगी। इस यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु ऊं पर्वत के दर्शन भी कर सकेंगे।

विश्व प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर तिब्बत में स्थित है। यहां शिव के वास स्थल के साथ ही साथ मानसरोवर भी है। जिसकी परिक्रमा श्रद्धालु करते हैं। ठीक इस तरह भारतीय क्षेत्र में आदि कैलास भी है। जिसे छोटा कैलास भी कहा जाता है। शिव की भूमि माने जाने वाले उत्तराखंड की धारचूला तहसील के अंतर्गत आने वाले इस धाम में भी कैलास पर्वत के आकार का हिमाच्छादित रहने वाला पर्वत है। इसी पर्वत के नजदीक मानसरोवर झील की तरह पार्वती सरोवर है। श्रद्धालु पर्वत के दर्शनों के साथ ही पार्वती सरोवर की परिक्रमा करते हैं। कोरोना के चलते पिछले दो वर्ष से न तो कैलास मानसरोवर यात्रा हो पाई है और नहीं आदि कैलास यात्रा। अब इस वर्ष आदि कैलास यात्रा कराई जाएगी। यात्रा आयोजक संस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम(केएमवीएन) ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

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भारत ने अब चीन सीमा लिपुलेख तक सड़क बना ली है। मई 2020 में इसका शुभारंभ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। सड़क बनने से पूर्व यात्रियों को मांगती से बूंदी, गुंजी होते हुए ज्योलिकांग पैदल पहुुंचना होता था। ज्योलिकांग मेें छोटा कैलास के दर्शन के बाद यात्रियों को ऊं पर्वत के दर्शनों के लिए कालापानी होते हुए नाबीढांग पहुंचना होता था। इसमें चार से पांच दिन का समय लगता था। अब एक ही दिन में पूरी यात्रा कर सकेंगे।
ऊं पर्वत प्रकृति का एक अनूठा चमत्कार है। यहां एक पहाड़ पर ऊं की आकृति उभरी हुई है। उभरी हुई दरारों में जब बर्फ जमा होती है तो यह पर्वत ऊं की आकृति के दर्शन देता है। बर्फ कम होने पर ऊं अक्षर पूरा नहीं दिखता। इस वर्ष भारी बर्फबारी से ऊं की पूरी आकृति के दर्शन होंगे। स्थानीय लोग इसे महादेव का आशीर्वाद मानते हैं।
पिछले दो वर्ष कोरोना के चलते यात्रा नहीं हो पाई थी, इस वर्ष कोरोना की स्थिति नियंत्रण में हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने जून से यात्रा शुरू कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं।

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