परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ का पहाड़ से गहरा नाता।

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  • देश के एक द्वीप का नाम मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम पर रखा गया
  • नैनीताल से प्रारंभिक पढाई, देहरादून से उच्च शिक्षा
  • 1942 में केआरसी मुख्यालय रानीखेत से मिला था कमीशन

संवादसूत्र देहरादून/रानीखेत: अंडमान और निकोबार के सबसे बड़े द्वीपों का नामकरण प्रथम परमवीर चक्र विजेता के नाम पर रखा गया। 03 नवंबर 1947 को मेजर सोमनाथ शर्मा की कमांड मे 4 कुमाऊं की एक कंपनी को पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा श्रीनगर में हमला करने के पश्चात बडगाम में एक लड़ाकू गश्त पर जाने का आदेश मिला। मेजर सोमनाथ शर्मा ने अटल निश्चय के साथ शत्रु से लड़ाई में अपनी कंपनी का नेतृत्व किया। गोलाबारी करते रहने का निर्देश देते रहे और इसी दौरान उनके नजदीक एक मोर्टार शेल आकर फटा जिससे वे वीरगति को प्राप्त हो गए।

मेजर सोमनाथ शर्मा आजाद भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता रहे। खास बात कि 22 फरवरी 1942 को मां भारती के इस वीर सपूत ने कुमाऊं रेजिमेंटल सेंटर (केआरसी) मुख्यालय रानीखेत से कमीशन प्राप्त किया था। डाढ़ गांव (हिमाचल प्रदेश) में जन्मे जांबाज सोमनाथ का उत्तराखंड से गहरा नाता रहा। प्रारंभिक पढ़ाई नैनीताल और प्रिंस आफ वेल्स रायल मिलिट्री कालेज देहरादून से उच्च शिक्षा प्राप्त कर वह सेना में भर्ती हो गए थे। 1942 में उन्हें केआरसी में कमीशन मिला। देश के लिए मर मिटने का जज्बा पाले मेजर सोमनाथ का हाथ चोटिल होने के बावजूद उन्होंने 1947 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में अदम्य साहस का प्रदर्शन किया। तीन नवंबर 1947 को दुश्मन सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर किया। जम्मू कश्मीर के बडगाम में महज 24 साल की उम्र में मातृभूमि की आन, बान व शान की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। रानीखेत का ऐतिहासिक सोमनाथ मैदान कुमाऊं रेजिमेंट के इसी जांबाज फौजी अफसर के नाम पर है। अब देश के एक द्वीप का नाम मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम पर रखा गया है।