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शहादत दिवस पर नवीन बहुगुणा की रचना

जो देश पर वो मर मिटे सच्चे कई इंसान हुए ।
लड़ते हुए जो वीर वो मजबूत वो तूफान हुए ।।
फंदों पे चढ़ वो देश के ही नाम पर कुर्बान हुए ।
लौ जो आज़ादी जला वे वीर हिंदुस्तान हुए ।।

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थी आखिरी वो सांस जो अंग्रेज सेना से लड़े ।
त्रिदेव देश के वीर जो मुश्किल में थे आगे बढ़े ।।
है जो वीर हिंदुस्तान के यू त्रिदेव थे जो धीर वो ।
है मुल्क भारत के सभी धारें बनी शमशीर जो ।।

वो कोख भी सूनी हुई जिस कोख जन्मे वीर वो ।
गुलाम भारत की सभी ने देखी थी तस्वीर जो ।।
वो हौसले मजबूत थे और न डर उन्हें था मौत का ।
चुका नहीं सकते कभी उस कर्ज पावन ज्योत का ।।

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सिंहों सी जो हुँकार थी,माँ भारती लाचार थी ।
ब्रिटिश हुकूमत से लड़ी जो त्रिदेव वो प्रहार थी ।।
भारत के सीने पर लगे गहरे कहीं वो घाव थे ।
वो त्रिदेव फांसी जो चढ़े देश की जो छाँव थे ।।

नवीन बहुगुणा✍️✍️
विचला जोगथ उत्तरकाशी
देवभूमि उत्तराखंड🙏🇮🇳

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