ब्रह्म की मुक्कमल रचना हूं मैं

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एम जोशी हिमानी

यदि मैं अपनी देह का
स्मरण न करूं तो
मुझे कभी नहीं लगा कि मैं
एक स्त्री हूं
अपने स्त्री होने का
कमतर होने का अहसास मुझे
हर पल
समाज ने कराया है
वरना मैं भी ब्रह्म की
एक मुकम्मल रचना हूं
वही आत्मा
वही परमात्मा
उन्हीं पंचतत्वों से बनी
दुनियां में आने-जाने की
वही प्रक्रिया
भावों और संवेदनाओं का
पुंज मैं
कर्तव्यों की
किसी पाठशाला सी मैं
फिर भी न जाने क्यों
मुझे दोयम दर्जा दिया गया
मेरे लिए
बेड़ियां बुनीं गईं
मेरी शक्ति को केवल
मंदिर में स्थापित किया गया
और पहचाना गया
मैं पत्थर की मूरत नहीं
इस दुनियां की
जीती-जागती तस्वीर हूं
न मैं आधी हूं
न तुम पूरे हो
जिंदगी की धुरी
कंधों पर मेरे भी
बराबर से टिकी है
इसलिए मेरा अस्तित्व
किसी दिन विशेष का
मोहताज नहीं है
मैं
आदि से हूं
और अनंत तक रहूंगी।

और पढ़ें  "ऐ मेरी ज़ोहरा जबीं"


एम जोशी हिमानी
सर्वाधिकार सुरक्षित

परिचय : एम जोशी हिमानी,
लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक
पूर्व सहायक निदेशक, सूचना एवं जनसंपर्क, विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ
प्रकाशित कृतियां-‘पिनड्राप साइलेंस’
‘ट्यूलिप के फूल’ कहानी संग्रह
‘हंसा आएगी जरुर’- उपन्यास
‘कसक’- कविता संग्रह
संस्मरणात्मक पुस्तक ‘वो लड़की गांव की’ लिख रही हूं.
कुमाऊनी कविता संग्रह- ‘द्वी आंखर’
का प्रकाशन विचाराधीन.
देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां-कविताएं प्रकाशित
संप्रति-स्वतंत्र लेखन

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