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गीत

“निशा गुप्ता

सखियाँ बरसो बाद मिली है , गीत मधुर हम गाएँगे ।
बचपन की वो सारी यादें, चलो याद कर आएँगे।

वो बचपन के झूले न्यारे, सुन्दर लगते थे सारे ।
प्यारा प्यारा रूप सलोना, अँखियाँ अब तक है धारे ।
नन्हे नन्हे सपने अपने ,छोड़ कहाँ हम जाएँगे
बचपन की वो सारी यादें, चलो याद कर आएँगें ।

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पंख खोल आकाश उड़े जब, बन पतंग लहराते थे ।
इंद्रधनुष के रंग धरा पर , हम कितना बिखराते थे ।
गुड्डे-गुड़िये खेल हमारा, यहाँ कहाँ मिल पाएँगें।
बचपन की वो सारी यादें, चलो याद कर आएँगें

सावन की वो याद पुरानी , मुझको कितना आती है ।
आओ सखियों झूला झूले मुझको बड़ा सताती है ।
आज लौट नेहर जब आई , मन आँगन में छाएँगे ।
बचपन की वो सारी यादें, चलो याद कर आएँगें ।

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निशाअतुल्य

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