उतर गई विधायक बनने का सपना पाले नेताओं के चेहरों की लाली,युवा जोश के सहारे केदारनाथ विधानसभा।

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केदारनाथ विधानसभा में लगभग 1.5 लाख मतदाता है। 2017 में भाजपा की पूर्व विधायिका आशा नौटियाल ने बगावत कर पार्टी उम्मीदवार को सत्ता से दूर रखा। लेकिन इस बार केदार घाटी के राजनीतिक चाणक्यो के अनुसार समीकरण बदल सकते हैं।

राज्य में 2022 का इम्तिहान होने में कुछ ही समय शेष बचा है। लेकिन सबसे ज्यादा मारा-मारी केदारनाथ विधानसभा में देखने को मिल रही है। दस सालों से भाजपा अपना विधायक नहीं बना पायी है,इसका प्रमुख कारण भी क्षेत्र वासियों के अनुसार गलत उम्मीदवार को टिकट देना बताया गया है।
केदारनाथ विधानसभा में लगभग 1.5 लाख मतदाता है। 2017 में भाजपा की पूर्व विधायिका आशा नौटियाल ने बगावत कर पार्टी उम्मीदवार को सत्ता से दूर रखा। लेकिन इस बार केदार घाटी के राजनीतिक चाणक्यो के अनुसार समीकरण बदल सकते हैं। मौजूदा विधायक जनता से दूर है,तो वही भाजपा में भी विधायक बनने का सपना पाले दो दर्जन से अधिक उम्मीदवार भी मैदान में नूरा कुश्ती करने को तैयार है। पहली मर्तबा भाजपा में अंदरूनी कलह को पूर्ण रूप से विराम मिल सकता है क्योंकि मोदी शाह व नड्डा की तिकड़ी के आगे कोई बागी दूर दूर तक टिक नही सकता है।
रविवार को सीमांत जनपद चमोली के प्रथम दौरे पर आये युवा मुख्यमंत्री ने भी साफ शब्दों में पार्टी कार्यकर्ताओं से कह दिया है कि पार्टी जिसे भी उम्मीदवार बनायेगी सभी उन्हीं के लिए काम करे। जिसका साफ संदेश गया कि बागी होने का मतलब सीधे बाहर का रास्ता। जिस कारण उम्मीदवारों के चेहरों की लाली उतर गई है।
वही केदार घाटी के बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस बार पार्टी युवा व भूतपूर्व सैनिक को टिकट दे तो केदारनाथ विधानसभा का वनवास समाप्त हो सकता है। उनका मानना है कि यदि जनता के बीच ऐसा उम्मीदवार हो जो सर्वमान्य के साथ साथ क्षेत्र में जिसकी उपलब्धता हो तो घाटी से काले बादल हट सकते है, साथ ही मिशन सिक्सटी भी प्राप्त किया जा सकता है।

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दीप

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