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उपेंद्र शर्मा

क्या संसार की ऐसी कोई भी भाषा है जिसमें कुछ भी लिखा हुआ हो और वो 2000 वर्ष से अधिक पुराना हो…? संसार के किसी भी कौने-कातर में कहीं कुछ ऐसा मिला हो…? संस्कृत वो भाषा है जिसका प्रमाण लिखित रूप में 2000 वर्ष पहले भी है…वेदों को एक पल के लिए छोड़ भी दिया जाये (जिनकी अवधि विशेषज्ञ लोग 5 से 10 हजार वर्ष पहले की मानते हैं) तब भी केवल शिलालेख ही देख लिए जाएं तो भी संस्कृत से प्राचीन कोई और भाषा मनुष्य इस धरा पर जानता समझता लिखता पढ़ता हो ऐसा कोई प्रमाण कहीं नहीं मिला है सिवाय संस्कृत के….
संस्कृत में लिखा एक शिलालेख हाथीबाड़ा घोसुन्डी (चित्तौड़गढ़ राजस्थान) के पास मिला है जो करीब 2200 साल पुराना है। इस शिलालेख में किसी वासुदेव द्वारा अश्वमेध यज्ञ कराने का उल्लेख मिलता है…इससे भी बहुत पुराने लिखित प्रमाण और भी हैं खासकर जंगल वाले प्रदेशों जैसे कर्नाटक, आंध्र, केरल, महाराष्ट्र आदि में….

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क्या इस संसार में कोई भी ऐसी भाषा सम्भव है जिसका जन्म संस्कृत से ना हुआ हो…क्या संस्कृत से अधिक स्पष्ट उच्चारण विश्व की किसी भी भाषा में है ? क्या विश्व की कोई भी भाषा ऐसी है जिसमें मां और बहन (स्त्री) का बलात्कार करने से सम्बंधित गालियां ना हो ? क्या विश्व में विद्वानों-बुद्धिजीवियों द्वारा इतने स्पष्ट प्रमाण के बावजूद हिन्दुओं को यह श्रेय दिया गया है कि उन्होंने संसार को बोलना, लिखना, पढ़ना सिखाया है किसी भी भाषा को…

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भाषा के जन्म के बाद ही तो ज्ञान विज्ञान तकनीक शिक्षा समझ आगे बढ़े होंगे या बिना भाषा ही दुनिया ने यह सारी यात्रा कर ली…2000 वर्ष पहले कौन सा धर्म या सभ्यता संस्कृति थे जो हिन्दुओं से अलग रहे हों अछूते रहे हों…क्या शिलालेख जो अब भी मिल रहे हैं। इजिप्ट (अफ्रीका) में सूर्य मंदिर अभी-अभी महीने भर पहले ही मिला है..से कोई और बड़े पुख्ता प्रमाण हैं किसी के पास…यह कौन लोग हैं दुनिया में जो स्वयं को हिन्दुओं से अलग और श्रेष्ठ बताने के लिए नित नए झूठे जतन कर रहे हैं…
भारत ही एकमात्र देश है संसार में जहां भाषा, धर्म और संस्कृति को इस तरह से मिटाया गया है कि देशी लोगों ने ही भुला दिया इनको…एक बेहद उन्नत व उर्वर मस्तिष्क, उत्कृष्ट प्रज्ञा और संवेदनशील हृदय वाली कौम को इतना हीन बनाया गया कि वो अपना सम्पूर्ण आत्म विश्वास ही खो बैठी…अपना परिचय तक खो दिया…इससे अधिक षड़यंत्र कहीं और किसी देश में हुआ हो तो देखना है…सम्भव तो नहीं लगता….

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उपेंद्र शर्मा ,जयपुर (राजस्थान)