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निशा गुप्ता

सारे रिश्ते बेटी बोती ।
सुख की छैया कब है सोती ।।
रहे पिता की राज दुलारी ।
ब्याह हुआ फिर होती न्यारी ।।

पत्नी बनती रहे निभाती ।
बहू कर्म तू करती जाती ।।
बन माँ अपना फर्ज जानती ।
रिश्तों का हर अर्थ साधती ।।

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रक्षा बंधन रहे मनाती ।
भैया पर अधिकार जताती ।।
भैया आता लिए भतीजा ।
रोली चंदन भाल सजाती ।।

भाभी की ले रही बलैया ।
नज़र उतारे बन कर छैया ।।
सब रिश्तों से कर मनमानी ।
बेटी जीवन जीना जानी ।।

सुरभित करती सबका जीवन ।
ये ही जीवन का सुन्दर धन ।।
रहे खिली ये बनी कली सी ।
विश्व पटल पर लगे भली सी ।।

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निशाअतुल्य