कविता

अलौकिक श्रीनगर गढ़वाल हमारा।

कविता "हरदेव नेगी" ये प्रकृति की सतरंगी चालदूर चमकता नन्दा हिवांळ,वो बदल रहा अनोखा स्वरूप,कितना अलौकिक श्रीनगर गढ़वाल।। विद्या का...

सागर तो खारे हैं बिल्कुल,नदिया न खारी हो जाये….काव्य महाकुंभ में कवियों ने बांधा समां।

संवादसूत्र देहरादून: "उत्तराखंड की जिया साहित्यिक कुटुम्भ" के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय काव्य महाकुंभ का आयोजन किया गया,,कर्यक्रम के...

‘होरि एैग्ये”…

हरदेव नेगी फागुंण चैत कि रंगीली बहार फूलु मा सौरी गे,रंगों कु सजीलु त्यवार होरि एैग्ये।।होरी एैग्ये, हो…. री एैग्ये,,,,ऐ…..!धारा...