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दीपशिखा गुसाईं

“अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस 27 मार्च “

संसार एक रंगमंच है ,,
हम किरदार निभाते हैं,.

जिंदगी कहानी इसकी ,
ऑंखें पर्दा बन जाती हैं,

हर रंग का मंचन इसमें ,
कैद होती ख्वाहिशें हजारों ,

हँसाना और मुस्कुराना पड़ता ,
रंगमंच की इस दुनियां में,

कभी चाहे कभी अनचाहे ही ,
निभाने हर किरदार हैं पड़ते,

और पढ़ें  "प्रेमचंद" और "समाज" तब और आज।

कभी खुद किरदार हैं गढ़ते ,
कभी बन कठपुतलियां हम,

अजीब सी कश्मकश में,
हरपल बेहतर अभिनय की ,

मुस्कान की चादर ओढ़े ,
कई परतें चढ़ा लेते हम ,

कल्पना की इस दुनियां को ,
चलो ऐसे सजाते हैं,

कुछ कहानी तुम गढो ,
कुछ किरदार निभाते हम ,

पर्दा गिरे जब रंगमंच का ,
तालियां ऐसी बजती रहे ,

हमारे बाद भी रंगमंच
याद हमें ही करता रहे ,,

और पढ़ें  कहो तो कुछ मीठा हो_जाऐ ।

“दीप”

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