उत्तराखण्ड
सरकारी धन बैंकों में पार्क नहीं कर पाएंगे विभाग, कोषागार से होगा भुगतान।

संवादसूत्र देहरादून। प्रदेश सरकार सरकारी धन के बेहतर प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भुगतान की नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। केंद्र की लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) की तर्ज पर अब राज्य पोषित योजनाओं के बिलों का भुगतान एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) के माध्यम से कोषागार से किया जाएगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य योजनाओं के लिए जारी सरकारी धन को बिना उपयोग के बैंकों में पड़े रहने से रोकना है। वित्त विभाग ने पहले चरण में पांच विभागों को चिह्नित किया है। इन विभागों में कोषागार के माध्यम से बिलों के भुगतान की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य विभागों को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।
बैंकों में पड़ा रहता था योजनाओं का पैसा
अभी तक राज्य सरकार की योजनाओं के लिए संबंधित विभागों को धनराशि जारी की जाती है। विभाग इस राशि को बैंक खातों में जमा कर देते हैं। कई बार स्वीकृत राशि का समय पर उपयोग नहीं होने के कारण सरकारी धन बैंकों में ही पड़ा रहता है। वित्त विभाग को ऐसी शिकायतें भी मिली हैं कि योजनाओं के लिए जारी धनराशि का समय पर उपयोग करने के बजाय उसे बैंकों में पार्क कर दिया जाता है।
इससे विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धनराशि का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता। वहीं, विकास योजनाओं में काम करने वाले ठेकेदारों के बिल विभागों को भेजे जाते हैं और विभाग बैंक खातों के माध्यम से उनका भुगतान करते हैं।
आईएफएमएस में किए जा रहे बदलाव
नई व्यवस्था लागू होने के बाद योजनाओं के बिलों का भुगतान सीधे कोषागार के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए आईएफएमएस सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। इससे विभागों के पास धनराशि को लंबे समय तक बैंक खातों में रखने की व्यवस्था समाप्त होगी और भुगतान वास्तविक बिल के आधार पर कोषागार के माध्यम से किया जाएगा।
वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि कोषागार के माध्यम से बिलों के भुगतान का उद्देश्य सरकारी धन को बैंकों में पार्क होने से रोकना है। नई व्यवस्था से सरकारी धन का बेहतर प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।




