उत्तराखण्ड
26-27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर नजर।

संवादसूत्र देहरादून: मौसम विभाग की ओर से अगले दो दिनों के लिए जारी रेड अलर्ट को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी संबंधित जिलों और विभागों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से वार्ता कर संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और संभावित आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में विशेष सतर्कता बरतने, जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को सक्रिय रखने और मौसम संबंधी चेतावनियों का तत्काल स्थानीय स्तर तक प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने भी मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन से मौसम की स्थिति और तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को मौसम पर लगातार नजर रखने और किसी भी संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए।
26 सितंबर को पांच जिलों में रेड अलर्ट
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने शुक्रवार को सभी 13 जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर को बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में रेड अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा में ऑरेंज तथा हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल में येलो अलर्ट है।
27 सितंबर को देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार में रेड अलर्ट, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में ऑरेंज तथा बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने तथा नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
जेसीबी और मशीनरी रणनीतिक स्थानों पर रखने के निर्देश
सचिव आपदा प्रबंधन ने अधिकारियों को नदी-नालों, गाड़-गदेरों और जलस्रोतों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में आसपास के लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
भूस्खलन संभावित सड़कों और क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने तथा जेसीबी एवं अन्य आवश्यक मशीनरी को रणनीतिक स्थानों पर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने पर यातायात जल्द बहाल किया जा सके।
सभी जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को 24 घंटे सक्रिय रखने के साथ पुलिस, एसडीआरएफ, अग्निशमन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, पेयजल, विद्युत और अन्य विभागों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने को कहा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव दलों की तैनाती और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
चारधाम यात्रा और पर्यटन स्थलों पर विशेष निगरानी
सचिव ने पर्वतीय मार्गों पर मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए ही यातायात संचालित करने तथा भूस्खलन एवं अतिवृष्टि संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने के निर्देश दिए। नदी-नालों और बरसाती धाराओं के आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक करने तथा तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से रोकने को कहा गया है।
चारधाम यात्रा मार्गों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। आमजन से मौसम विभाग और जिला प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा नदी-नालों एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा मौसम की लगातार निगरानी की जा रही है। आपात स्थिति में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के टोल फ्री नंबर 1070, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र 1077 और आपातकालीन सेवा 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
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