उत्तराखण्ड
27 अक्टूबर से शुरू गैरसैंण सत्र, पहले दिन पेश होगा 7 हजार करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा के गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण में 27 अक्टूबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के पहले दिन अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा, जबकि दूसरे दिन इसे पारित कराया जाएगा। शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के यमुना कॉलोनी स्थित आवास पर हुई कार्यमंत्रणा बैठक में दो दिवसीय सत्र का एजेंडा तय किया गया। सर्वदलीय बैठक में सभी दलों से सदन के संचालन में सहयोग की अपेक्षा की गई। हालांकि, कांग्रेस ने कार्यमंत्रणा और सर्वदलीय बैठक, दोनों का बहिष्कार किया।
इस सत्र में सरकार सात हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पेश करेगी। कैबिनेट पहले ही इस बजट को मंजूरी दे चुकी है। तय कार्यक्रम के अनुसार, सत्र के पहले दिन सदन में निधन प्रस्ताव लाया जाएगा। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री जनरल बीसी खंडूड़ी, पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट सहित अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद भोजनावकाश के बाद अनुपूरक बजट सदन में पेश किया जाएगा।
सत्र के दौरान विभिन्न विधेयकों के साथ विभागों और निगमों की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी। शनिवार को हुई बैठक में संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल और बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद शामिल हुए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
दो दिन का सत्र जनता के मुद्दों से बचने की कोशिश : आर्य
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार संख्याबल के आधार पर अपनी मनमर्जी से सत्र संचालित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि कार्यमंत्रणा बैठक में विपक्ष की बात नहीं सुनी जाएगी तो उसमें शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार, सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी कर रही है।
आर्य ने कहा कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि विधानसभा सत्र गैरसैंण में आयोजित किया जा रहा है, जबकि कार्यमंत्रणा और सर्वदलीय बैठक देहरादून में हो रही हैं। आमतौर पर जिस स्थान पर सत्र आयोजित होता है, वहीं इन बैठकों का आयोजन किया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि गैरसैंण में कम से कम सात दिन का सत्र होना चाहिए था। चुनावी वर्ष में विधायकों के पास जनता से जुड़े कई मुद्दे उठाने का अवसर होता है, लेकिन दो दिन के सत्र में पहले दिन श्रद्धांजलि और अनुपूरक बजट की कार्यवाही के चलते जनहित के सवालों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार सदन में जनता के मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहती है।



