उत्तराखण्ड
देहरादून पहुंचे केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, बोले- सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है केंद्र सरकार।

देहरादून, 7 अगस्त। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले शुक्रवार को दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर देहरादून पहुंचे। बीजापुर गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने केंद्र सरकार की सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत देशभर में 58.30 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं, जिनमें उत्तराखंड में 40.91 लाख खाते शामिल हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत देशभर में 58.31 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जबकि उत्तराखंड में 36.87 लाख लाभार्थियों को ऋण मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है।
अठावले ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देशभर में 12.17 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिला है। उन्होंने नशा मुक्ति के लिए 790 केंद्रों की स्थापना, वृद्धाश्रमों को सहयोग, वित्तीय समावेशन और एमएसएमई व युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।
आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह संविधान प्रदत्त व्यवस्था है और इसका विरोध संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित जातीय जनगणना से विभिन्न समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करने तथा पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर कहा कि सरकार ने इसके खिलाफ सख्त कानून बनाया है और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मानसून सत्र का उल्लेख करते हुए अठावले ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के शांतिपूर्ण और सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।




