उत्तराखण्ड
‘सशक्त बहना उत्सव’ अब रक्षाबंधन से 15 दिन पहले, पखवाड़े के रूप में होगा आयोजित।




संवादसूत्र देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के तहत उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉलों का अवलोकन कर महिलाओं द्वारा तैयार राखियों और विभिन्न स्थानीय उत्पादों की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष से रक्षाबंधन के 15 दिन पहले ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ शुरू किया जाएगा और इसे पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक समय और बेहतर बाजार मिलेगा तथा उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तीन साल में 4,480 स्टॉल, 12.50 करोड़ के उत्पादों की बिक्री
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के 95 विकासखंडों में 4,480 स्टॉल लगाए गए, जिनके माध्यम से करीब 12.50 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई है। उन्होंने कहा कि अवसर और बाजार मिलने पर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह संचालित हैं, जिनसे 5.20 लाख से अधिक ग्रामीण परिवार जुड़े हैं। इनके सहयोग के लिए 8 हजार से अधिक ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन भी कार्य कर रहे हैं।
‘सशक्त बहना बाजार’ के रूप में होगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए प्रदेश में मजबूत विपणन व्यवस्था विकसित की जा रही है। 49 ग्रोथ सेंटर, 17 सरस सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और आठ बेकरी यूनिट स्थापित की गई हैं। यात्रा मार्गों पर 110 बिक्री केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। सचिवालय सहित अन्य स्थानों पर स्थायी बिक्री केंद्रों और राज्य स्तरीय सरस मेलों के माध्यम से भी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘सशक्त बहना उत्सव’ का विस्तार कर इसे ‘सशक्त बहना बाजार’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके माध्यम से महिलाओं के उत्पादों को पर्यटन स्थलों, धार्मिक यात्रा मार्गों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट और होटल-रिसॉर्ट तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और प्रदेश में तीन लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान मिल रही है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग, डिजिटल भुगतान और विपणन का प्रशिक्षण देकर उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों से खरीदारी कर उन्हें प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना ही ‘वोकल फॉर लोकल’ की वास्तविक भावना है। इससे मातृशक्ति के हुनर और परिश्रम को सम्मान मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं परिवार के साथ खेती, पशुपालन और विभिन्न आजीविका गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और अब अपने कौशल व उद्यमशीलता के बल पर सफल उद्यमी के रूप में भी आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा समान नागरिक संहिता को उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव झरना कमठान, अनुराधा पाल, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह सहित विभिन्न जिलों के मुख्य विकास अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।




