उत्तराखण्ड
कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि, सीएम ने बढ़ाई परमवीर चक्र विजेताओं की सम्मान राशि।





संवादसूत्र देहरादून: कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1999 के कारगिल युद्ध में देश के 527 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। उन्होंने उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि बताते हुए कहा कि प्रदेश की सैन्य परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख की जा चुकी है। वीरता पुरस्कार विजेताओं की सम्मान राशि में भी वृद्धि की गई है। साथ ही बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, बेटियों के विवाह के लिए सहायता, राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा, स्टाम्प शुल्क में छूट तथा पूर्व सैनिकों के शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे कई फैसले लागू किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य का ‘पांचवां धाम’ सैन्य धाम अंतिम चरण में है, जहां प्रदेश के सभी शहीदों के घरों से लाई गई पवित्र मिट्टी का उपयोग किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ गठित किया जा रहा है और उन्हें राज्य की विभिन्न सेवाओं में प्राथमिकता देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज्य सरकार सैनिकों और शहीद परिवारों के सम्मान व कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक और शहीदों के परिजन भी उपस्थित रहे।




