उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण, 112 सायरनों पर मिला अलर्ट।
संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखंड में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की कार्यक्षमता परखने और आमजन को भूकम्प के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे सायरन बजाकर मॉक ड्रिल की गई। इस दौरान प्रदेश में स्थापित 112 सायरनों पर अलर्ट प्राप्त हुआ। इसके साथ ही भूदेव मोबाइल ऐप पर भी परीक्षण चेतावनी मिली। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की गई।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन एसईओसी में उपस्थित रहे और परीक्षण की निगरानी की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के वैज्ञानिक भी ऑनलाइन माध्यम से केंद्र से जुड़े रहे। परीक्षण के दौरान सायरनों की कार्यप्रणाली और मोबाइल ऐप पर प्राप्त चेतावनी का अवलोकन कर प्रणाली की स्थिति का आकलन किया गया।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण काफी हद तक सफल रहा है। जिन स्थानों पर सायरनों के संचालन में तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं, उन्हें आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक चिह्नित कर रहे हैं। संबंधित कमियों का आकलन कर उन्हें दूर कराया जाएगा, ताकि सभी सायरन जरूरत के समय प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
169 सेंसर और 112 सायरनों से निगरानी
सचिव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित हैं। सेंसर के माध्यम से भूकम्पीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है, जबकि सायरनों के जरिए चेतावनी प्रसारित करने की व्यवस्था की गई है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और आईआईटी रुड़की के सहयोग से परियोजना के अंतर्गत अतिरिक्त सेंसर स्थापित करने का प्रस्ताव भी प्रक्रियाधीन है।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सेंसर स्थापित होने से भूकम्पीय गतिविधियों की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता में सुधार करने में मदद मिलेगी। नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उन्हें दूर किया जा सकेगा। इससे वास्तविक आपदा की स्थिति में चेतावनी प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
हर महीने की 9 तारीख को होगा परीक्षण
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देशों के अनुसार, प्रदेश में प्रत्येक माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे सायरन बजाकर प्रणाली का नियमित परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान सायरनों के संचालन और चेतावनी व्यवस्था की जांच होगी। किसी भी स्थान पर तकनीकी समस्या सामने आने पर उसे दूर करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सचिव ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को बजाया गया सायरन पूर्व निर्धारित परीक्षण का हिस्सा था, न कि किसी वास्तविक भूकम्प की चेतावनी। इस अभ्यास का उद्देश्य लोगों को सायरन की आवाज से परिचित कराना भी है, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में वे सतर्क रहकर आवश्यक सावधानियां बरत सकें।
भूदेव ऐप अपडेट रखने की अपील
विनोद कुमार सुमन ने आमजन से अपील की कि वे अपने मोबाइल फोन में भूदेव ऐप का अद्यतन संस्करण इंस्टॉल रखें और ऐप को लोकेशन की अनुमति दें, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में चेतावनी संदेश प्राप्त करने में सुविधा हो। उन्होंने कहा कि भूकम्प जैसी आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए तकनीकी व्यवस्था मजबूत करने के साथ जनजागरूकता और व्यक्तिगत सतर्कता भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संबंधित संस्थानों के सहयोग से भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।



