आपदा
उत्तराखंड में 28 नवंबर को मनेगा आपदा प्रबंधन दिवस, प्रदेशभर में होंगे मॉक ड्रिल।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखंड में अब प्रतिवर्ष 28 नवंबर को आपदा प्रबंधन दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष 25 से 28 नवंबर तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य आपदाओं के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, पूर्व तैयारियों को मजबूत करने और आपदा के समय त्वरित एवं सुरक्षित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 28 नवंबर को राज्य स्तर पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जबकि जिला, तहसील, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर भी मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियां संचालित होंगी।
आपदा प्रबंधन दिवस मनाने की घोषणा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की है। इसका संबंध वर्ष 2023 में उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में हुए रेस्क्यू अभियान से है। 28 नवंबर 2023 को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों के समन्वय, आधुनिक तकनीक और सामूहिक प्रयासों से सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इसी ऐतिहासिक अभियान की स्मृति में यह दिवस मनाया जाएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन मंत्री के निर्देशों के अनुसार तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
कार्यक्रमों के तहत सरकारी कार्यालयों, निगमों, निकायों और संस्थानों में आपदा सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। प्रत्येक कार्यालय में तीन से पांच सदस्यों की समिति गठित कर आग, बिजली दुर्घटना, भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य संभावित खतरों का आकलन किया जाएगा। अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, वैधता और कार्यशीलता भी जांची जाएगी।
25 से 27 नवंबर के बीच प्रत्येक जिले में एक दिन न्यूनतम आठ से दस स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। अस्पतालों, विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, पावर प्रोजेक्ट, सुरंगों और भीड़भाड़ वाले स्थानों को इसके लिए चिह्नित किया जाएगा। 28 नवंबर को जिला मुख्यालयों में राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
तहसील स्तर पर 50 से 100 स्वयंसेवकों को जोड़कर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन विभाग, आपदा मित्र, आपदा सखी, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्वयं सहायता समूह और रेडक्रॉस सहित विभिन्न संगठनों की भागीदारी रहेगी।
विकासखंड स्तर पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों की बैठकें आयोजित कर आपदा जोखिम कम करने के उपायों की जानकारी दी जाएगी। जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रमों के साथ स्थानीय स्वयंसेवकों को प्राथमिक उपचार तथा खोज एवं बचाव का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग को 100 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए गए हैं। 28 नवंबर को स्कूलों में निबंध, वाद-विवाद, पोस्टर, स्लोगन और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। स्वास्थ्य विभाग सरकारी और निजी अस्पतालों में आपदा प्रबंधन योजनाओं, सुरक्षित निकासी और प्राथमिक उपचार की व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगा।
इसके अलावा पशुपालन विभाग पशुधन की सुरक्षा और सुरक्षित निकासी के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा। वन विभाग वनाग्नि की रोकथाम और नियंत्रण का प्रशिक्षण देगा। ऊर्जा विभाग को सभी पावर हाउस में संभावित खतरों का आकलन कर 28 नवंबर को मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
28 नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान के अनुभवों पर चर्चा के साथ पारंपरिक और आधुनिक राहत-बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।



