उत्तराखण्ड
पहाड़ की लोकधुनों को मिला सम्मान,हेमा नेगी करासी होंगी उत्तराखंड गौरव सम्मान से अलंकृत।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, पारंपरिक लोकसंगीत और पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को अपनी आवाज के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने वाली सुप्रसिद्ध लोकगायिका हेमा नेगी करासी को प्रतिष्ठित ‘उत्तराखंड गौरव सम्मान-2026’ के लिए चयनित किया गया है। उनके चयन से प्रदेश के सांस्कृतिक जगत में खुशी की लहर है।
प्रताप थलवाल से विशेष बातचीत में हेमा नेगी करासी ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकभाषा और पारंपरिक संगीत के लिए काम करना उनके लिए हमेशा से साधना रहा है। इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चयनित होना उनके लिए गर्व के साथ भावुकता का भी क्षण है।
उन्होंने कहा, “यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और उन सभी लोककलाकारों का सम्मान है, जो अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।”
6 नवंबर को परेड ग्राउंड में होगा सम्मान समारोह
उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी सूचना के अनुसार, राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 6 नवंबर 2026 को सुबह नौ बजे देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेमा नेगी करासी को अपने हाथों से उत्तराखंड गौरव सम्मान प्रदान करेंगे। समारोह में सहभागिता के लिए उन्हें राज्य अतिथि घोषित किया गया है।
लोकगीतों में समाई है पहाड़ की पहचान
बातचीत के दौरान हेमा नेगी करासी ने कहा कि लोकगीत केवल मनोरंजन या संगीत का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें हमारी पहचान, परंपराएं, पूर्वजों की विरासत और पहाड़ का जनजीवन समाहित है। लोकगीतों को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने अपने गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गढ़वाली लोकसंगीत को विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनके गीतों में पहाड़ का जनजीवन, पारंपरिक रीति-रिवाज, लोक आस्थाएं और सामाजिक परंपराएं जीवंत रूप में दिखाई देती हैं।
नई पीढ़ी को लोकसंस्कृति से जोड़ने की जरूरत
हेमा नेगी करासी का मानना है कि किसी भी प्रदेश की वास्तविक पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से होती है। लोककलाकारों को मिलने वाला सम्मान न केवल उनके योगदान को पहचान देता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जुड़ने और लोककला के संरक्षण के लिए आगे आने की प्रेरणा देता है।
उत्तराखंड गौरव सम्मान-2026 के लिए उनका चयन उनके लंबे सांस्कृतिक सफर और लोकसंगीत के प्रति समर्पण की महत्वपूर्ण पहचान है। यह सम्मान उनके व्यक्तिगत योगदान के साथ ही उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकभाषा और पारंपरिक संगीत को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला अवसर है।



