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सीसीटीएनएस की राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तराखंड का सुधार, 13वें से 9वें स्थान पर पहुंचा।

उत्तराखण्ड

सीसीटीएनएस की राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तराखंड का सुधार, 13वें से 9वें स्थान पर पहुंचा।

संवादसूत्र देहरादून: क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) की राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तराखंड ने सुधार किया है। जुलाई 2026 तक सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड में राज्य 9वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पिछली समीक्षा में उत्तराखंड 13वें स्थान पर था। इस तरह राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग में चार स्थान का सुधार हुआ है। वहीं, आईसीजेएस 2.0 डैशबोर्ड में उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सीसीटीएनएस परियोजना के तहत राज्य शीर्ष समिति की बैठक में सीसीटीएनएस और आईसीजेएस 2.0 की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में तकनीकी अवसंरचना, नेटवर्क कनेक्टिविटी, डेटा रिकवरी सेंटर, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और सिस्टम इंटीग्रेटर समेत विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई।

गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आईसीजेएस 2.0 के तहत राज्य में ई-साक्ष्य, न्यायश्रुति, ई-समन, ई-साइन और मेडलीप्र सहित विभिन्न डिजिटल अनुप्रयोगों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इनके माध्यम से पुलिस, अभियोजन, कारागार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कार्यों में डिजिटल समन्वय और दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

बैठक में एनसीएलआई डैशबोर्ड की प्रगति की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों के अनुसार, 17 सितंबर 2026 तक उत्तराखंड ने एनसीएलआई डैशबोर्ड में 18वीं रैंक हासिल की है, जबकि पिछली समीक्षा में राज्य 24वें स्थान पर था। इस तरह रैंकिंग में छह स्थान का सुधार हुआ है। परिचालन दक्षता और आईसीटी एप्लीकेशन के क्षेत्र में भी राज्य ने प्रगति दर्ज की है।

242 साइटों की कनेक्टिविटी की समीक्षा

आईसीजेएस 2.0 के तहत राज्य योजना में पुलिस, अभियोजन, कारागार और एफएसएल से संबंधित कुल 242 साइटें शामिल हैं। इनमें 166 पुलिस स्टेशन, 64 अभियोजन स्थल, 10 कारागार और दो एफएसएल साइटें हैं। कनेक्टिविटी के लिए एसडब्ल्यूएएन, बीएसएनएल और लोकल वीपीएन के माध्यम से व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने बताया कि 166 पुलिस स्टेशनों में से 31 को अपग्रेड किया जा चुका है।

मुख्य सचिव ने कनेक्टिविटी और अपग्रेडेशन कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल पुलिसिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए तकनीकी आधारभूत ढांचा विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण होना जरूरी है।

सीसीटीएनएस के लिए अलग डेटा रिकवरी इकोसिस्टम

मुख्य सचिव ने आईटीडीए को सीसीटीएनएस के लिए अलग डेटा रिकवरी इकोसिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डेटा रिकवरी सेंटर के माध्यम से महत्वपूर्ण सेवाओं की निरंतरता, डेटा सुरक्षा और डेटा रिकवरी क्षमता को मजबूत किया जाए। साथ ही भौगोलिक रूप से पृथक और सुरक्षित रिकवरी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने आईटीडीए को सीसीटीएनएस के अंतर्गत सभी संबंधित सॉफ्टवेयर के लिए तत्काल डेटा रिकवरी सेंटर तैयार करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

एफआईआर में दर्ज हो सही और पूरा विवरण

मुख्य सचिव ने गृह विभाग और आईटीडीए को मिलकर ऐसा प्रभावी मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे एफआईआर दर्ज करते समय संबंधित व्यक्तियों का नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल सहित अन्य आवश्यक विवरण सही और स्पष्ट रूप से दर्ज किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे ई-समन और अन्य वैधानिक कार्रवाई संबंधित पक्ष तक शीघ्रता से पहुंचाने में मदद मिलेगी और डिजिटल सिस्टम की परिचालन दक्षता भी बढ़ेगी।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अगले दो माह में निर्धारित विभिन्न पैरामीटर में सुधार करने, लक्ष्यों को बढ़ाने और ऑपरेशनल प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

बैठक में आईसीजेएस 2.0 के लिए आवश्यक हार्डवेयर की खरीद और बजट की भी समीक्षा की गई। सीसीटीएनएस 2.0 के तकनीकी सहयोग एवं क्रियान्वयन के लिए नए सिस्टम इंटीग्रेटर के चयन हेतु आरएफपी जारी करने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सचिव गृह शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक एपी अंशुमान, एनआईसी से राकेश शर्मा, अपर सचिव नवनीत पांडे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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