उत्तराखण्ड
मुख्य सचिव ने लिया ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का संकल्प, सुशासन और हिमालय संरक्षण पर संकल्प।

संवादसूत्र देहरादून, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, पुलिस एवं पीएसी जवानों और विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति जिम्मेदारी और संकल्प का अवसर है।
मुख्य सचिव ने कहा कि आज भारत आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब लक्ष्य ऐसा समावेशी, सतत और गुणवत्तापूर्ण विकास सुनिश्चित करना है, जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने उत्तराखण्ड के गठन के 25 वर्षों को आत्मावलोकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर बताते हुए कहा कि राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हालांकि पलायन, रोजगार, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जल स्रोतों का संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा जैसी चुनौतियों पर अभी निरंतर काम करने की जरूरत है।
विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य
मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तराखण्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड’ का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब पहाड़ का युवा अपने गांव में सम्मानजनक रोजगार पा सके, महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।
उन्होंने प्रशासन को ‘फाइल डिस्पोजल’ से ‘आउटकम डिलीवरी’ की ओर ले जाने पर जोर दिया। अधिकारियों और कर्मचारियों से नागरिक-केंद्रित प्रशासन अपनाने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और डाटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के अधिकतम उपयोग का आह्वान किया।
गांव, युवा और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की वास्तविक शक्ति गांवों, महिलाओं, युवाओं और प्राकृतिक संसाधनों में है। मिलेट्स, स्थानीय कृषि उत्पाद, बागवानी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, हस्तशिल्प और जैविक उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता है। महिला स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने। स्टार्टअप, पर्यटन, आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा, नवाचार और क्रिएटिव इकोनॉमी में नए अवसर पैदा करने होंगे, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े।
हिमालय संरक्षण के साथ विकास
मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड को हिमालय का प्रहरी बताते हुए कहा कि नदियां और जंगल राज्य की सभ्यता, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के आधार हैं। विकास मॉडल हिमालय-संवेदनशील होना चाहिए। आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण को प्राथमिकता देते हुए अर्ली वार्निंग सिस्टम, रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट और जलवायु अनुकूलन को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की आवश्यकता है।
पर्यटन को अधिक संख्या के बजाय रिस्पॉन्सिबल, सस्टेनेबल और हाई-वैल्यू टूरिज्म की दिशा में ले जाने की बात कहते हुए उन्होंने स्पिरिचुअल, वेलनेस एवं योग, एडवेंचर, इको-टूरिज्म, होमस्टे, विंटर और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता को कार्यसंस्कृति का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदों पर मिले अधिकार व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि जनता की ओर से सौंपी गई जिम्मेदारियां हैं। प्रत्येक निर्णय उत्तराखण्ड के हित में और प्रत्येक प्रयास जनहित में होना चाहिए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव, सचिव, अपर सचिव, सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।




