उत्तराखण्ड
एलटी ग्रेड शिक्षकों-प्रवक्ताओं की वरिष्ठता पर हाईकोर्ट का फैसला,1 अक्टूबर 1990 से मिलेगा नियमितीकरण का लाभ।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार एवं अन्य पक्षों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे शिक्षकों की सेवाएं 1 अक्टूबर 1990 से नियमित मानी जाएंगी तथा वरिष्ठता भी उसी तिथि से प्रभावी होगी।
अदालत ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही भुवन चंद्र कांडपाल प्रकरण में तय हो चुका है, जिसे हाईकोर्ट की खंडपीठ और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। इसलिए इस विषय पर दोबारा विचार करने का कोई औचित्य नहीं है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पूर्व न्यायिक आदेशों के अनुपालन में नवंबर 2025 में संशोधित वरिष्ठता सूचियां जारी की जा चुकी हैं। इसके तहत गढ़वाल मंडल के 268, कुमाऊं मंडल के 259 एलटी ग्रेड शिक्षकों तथा पूरे प्रदेश के 418 प्रवक्ताओं को 1 अक्टूबर 1990 से नियमितीकरण और उसी तिथि से वरिष्ठता का लाभ प्रदान किया जा चुका है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 21 नवंबर 1995 के शासनादेश तथा उसके आधार पर दिए गए नियमितीकरण और वरिष्ठता लाभ को अब दोबारा चुनौती नहीं दी जा सकती। यह फैसला उन सभी शिक्षकों पर लागू होगा जिनकी तदर्थ नियुक्ति 1 अक्टूबर 1990 से पहले हुई थी। इस निर्णय से प्रदेश के सैकड़ों एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति तथा अन्य सेवा लाभों का मार्ग प्रशस्त हो गया है।




