उत्तराखण्ड
विशेष बच्चों के विकास के लिए शिक्षा विभाग की नई पहल, शिक्षकों की कमी बनी चुनौती।

संवादसूत्र देहरादून: सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विशिष्ट आवश्यकता वाले छात्र-छात्राओं के शैक्षिक, शारीरिक और कौशल विकास को प्रभावी बनाने के लिए विकासखंड स्तर पर विशेष शिक्षकों की भूमिका तय की गई है। गढ़वाल मंडल के अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) प्रमेन्द्र कुमार ने इस संबंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और उप शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार, विशेष शिक्षक अपने विद्यालय की जिम्मेदारियों के साथ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले अन्य विद्यालयों में पढ़ने वाले विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की गतिविधियों का भी समन्वय करेंगे। विद्यार्थियों की विशेष जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर उनकी पहचान कर उनके सर्वांगीण विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
अपर शिक्षा निदेशक ने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर नियुक्त विशेष शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ विकासखंड के सभी संबंधित विद्यार्थियों को मिलना चाहिए। इसके लिए विशेष शिक्षकों का समूह बनाया जा सकता है। शिक्षकों की दक्षता और अनुभव के आधार पर उन्हें विभिन्न गतिविधियों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक सहयोग मिल सके।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ उनके शैक्षिक, शारीरिक और विभिन्न कौशलों के विकास के लिए कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य इन विद्यार्थियों को विद्यालयों में समान अवसर और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
विशेष शिक्षकों के कई पद खाली, कार्ययोजना पर सवाल
विभाग की इस पहल के बीच प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में विशेष शिक्षकों के रिक्त पद चुनौती बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पौड़ी जिले में विशेष शिक्षकों के 38 पद खाली हैं। इसके अलावा चमोली में 21, रुद्रप्रयाग में नौ, टिहरी में 16, उत्तरकाशी में 10, देहरादून में पांच, हरिद्वार में 16, नैनीताल में 21, अल्मोड़ा में 23 और बागेश्वर में तीन पद रिक्त हैं। अन्य जिलों में भी पद खाली बताए गए हैं।
विशेष शिक्षकों की कमी को देखते हुए कुछ शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने पर विकासखंड स्तर पर विद्यार्थियों के लिए प्रभावी कार्ययोजना कैसे तैयार और संचालित की जाएगी। ऐसे में विभागीय निर्देशों को धरातल पर लागू करने के लिए रिक्त पदों को भरना और उपलब्ध शिक्षकों का प्रभावी उपयोग करना महत्वपूर्ण होगा।



