उत्तराखण्ड
माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान को सेना ने दिखाई हरी झंडी

संवादसूत्र देहरादून/रुड़की, 5 सितंबर। भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की ओर से 7,120 मीटर ऊंचे माउंट त्रिशूल के लिए पर्वतारोहण अभियान शनिवार को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से रवाना किया गया। ‘हर काम देश के नाम’ की भावना के साथ शुरू किया गया यह अभियान गढ़वाल हिमालय की चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक पर चढ़ाई का प्रयास है।
अभियान को सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया ने हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स के कई अनुभवी पर्वतारोही अधिकारी भी मौजूद रहे।
माउंट त्रिशूल की 7,120 मीटर ऊंचाई, कठिन पर्वतीय मार्ग और तेजी से बदलता मौसम अभियान दल के लिए बड़ी चुनौती होंगे। अभियान में शामिल अधिकारियों और जवानों ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों के अनुकूलन, शारीरिक प्रशिक्षण तथा पर्वतारोहण की तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
रवानगी से पहले अभियान दल के नेता ने ऑपरेशनल ब्रीफिंग दी। इसमें प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम, चढ़ाई के मार्ग, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम से निपटने के लिए किए गए प्रशासनिक इंतजामों की जानकारी दी गई।
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान दल की फिटनेस, मानसिक मजबूती और टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्वतारोहण अभियान नेतृत्व, अनुशासन, सहनशक्ति, टीमवर्क और सोच-समझकर जोखिम उठाने की क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये गुण विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य तैयारियों के लिए अहम हैं।
समारोह के अंत में अभियान दल के नेता को औपचारिक ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपा गया। इसके साथ ही दल को बेस कैंप के लिए रवाना किया गया, जहां से माउंट त्रिशूल की चढ़ाई शुरू होगी।
यह अभियान कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना के साहस, दृढ़ता, अनुशासन और उत्कृष्टता की भावना को प्रदर्शित करता है।




