उत्तराखण्ड
धामी कैबिनेट के फैसलों से जनकल्याण, रोजगार और विकास को नई रफ्तार।

संवादसूत्र देहरादून, 7 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में जनकल्याण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, श्रमिक हित, शिक्षा, खेल, न्यायिक आधारभूत ढांचे, पर्यटन, पेयजल और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। महानिदेशक सूचना एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने प्रेस वार्ता में कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी दी।
कैबिनेट ने राज्य सेक्टर की गौ पालन योजना का दायरा बढ़ाते हुए सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी इसमें शामिल करने का फैसला किया है। अब लाभार्थी गाय के साथ भैंस खरीदने का विकल्प भी चुन सकेंगे। पशु की यूनिट कॉस्ट 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। पहले वर्ष में लगभग 2,128 पशुपालकों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
बैठक में उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, प्रत्येक माह की सात तारीख तक वेतन, डिजिटल भुगतान और समान कार्य के लिए महिला एवं पुरुष को समान वेतन जैसे प्रावधान लागू होंगे। वहीं उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली-2026 को भी स्वीकृति मिली, जिसमें औद्योगिक विवादों के समयबद्ध समाधान, ट्रेड यूनियनों की मान्यता, शिकायत निवारण समितियों के गठन और श्रमिक री-स्किलिंग फंड की व्यवस्था शामिल है।
कैबिनेट ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावासों के लिए नई संचालन नियमावली लागू करने का निर्णय लिया, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर आवास, भोजन और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति के ढांचे में संशोधन किया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण, कूड़ा प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को मजबूत किया जा सके।
बैठक में हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में प्रस्तावित हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए लगभग 40 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी दी गई। साथ ही गौलापार स्थित उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के संचालन के लिए 122 नियमित पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई।
इसके अलावा जीएसटी अधिनियम में केंद्र के अनुरूप संशोधन अध्यादेश लाने, जल जीवन मिशन की योजनाओं के हस्तांतरण के लिए नया प्रोटोकॉल लागू करने, वन विकास निगम में स्केलर भर्ती प्रक्रिया को लिखित परीक्षा के माध्यम से अधिक पारदर्शी बनाने तथा सहकारी समिति नियमावली से भेदभावपूर्ण प्रावधान हटाने का निर्णय लिया गया।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए जाने को भी मंजूरी दी। सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक निवेश, व्यापार और रोजगार को नई गति मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, श्रमिकों के अधिकारों को संरक्षण मिलेगा, शिक्षा और खेल सुविधाओं का विस्तार होगा तथा राज्य में समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।




