उत्तराखण्ड
सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए प्राथमिकता से चुनी जाएंगी परियोजनाएं: मुख्य सचिव।

संवादसूत्र देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) की राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति (एसएलएससी) की बैठक हुई। बैठक में कार्यक्रम के फेज-1 और फेज-2 के तहत प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई और कई परियोजनाओं को संस्तुति प्रदान की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं का चयन और प्राथमिकता निर्धारण किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों में परियोजनाओं की प्राथमिकता स्पष्ट होनी चाहिए और सूची प्राथमिकता के अवरोही क्रम में तैयार की जाए।
उन्होंने सीमावर्ती गांवों में सड़क एवं विद्युत ग्रिड कनेक्टिविटी, नेटवर्क, टेलीविजन एवं संचार सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कार्यों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करते समय सेना, एसएसबी और आईटीबीपी से संबंधित आवश्यक परियोजनाओं को भी समिति के समक्ष रखा जाए। साथ ही संबंधित जिलों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं के लिए केंद्र या राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के तहत वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं, उन्हें संबंधित योजनाओं के माध्यम से वित्तपोषित कराने का प्रयास किया जाए। ऐसी परियोजनाओं को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की सूची से हटाकर उनके स्थान पर अन्य आवश्यक और प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को शामिल किया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि फेज-1 और फेज-2 के तहत सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता तय करने के बाद ही केंद्र सरकार को भेजा जाए। उन्होंने प्रत्येक संबंधित जिले से पांच-पांच बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए। इन परियोजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं, कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन, आजीविका और सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखने को कहा गया।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, डीजी कारागार अभिनव कुमार, सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, सी. रविशंकर, आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।




