उत्तराखण्ड
एमपीजी कॉलेज मसूरी की व्यवस्था सुधारने को सरकार ने शुरू की प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्ति की प्रक्रिया।

संवादसूत्र देहरादून/मसूरी: एमपीजी कॉलेज, मसूरी में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी समस्याओं के समाधान और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उच्च शिक्षा विभाग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 के तहत महाविद्यालय में प्राधिकृत नियंत्रक (Authorized Controller) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एमपीजी कॉलेज की स्थापना 1963 में हुई थी और इसका संचालन प्रबंधन समिति के माध्यम से किया जाता रहा है। महाविद्यालय हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से संबद्ध है। नगर निकाय चुनावों के बाद नई प्रबंधन समिति के अनुमोदन की प्रक्रिया लंबित है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, विश्वविद्यालय ने भी सरकार को अवगत कराया है कि समिति के अनुमोदन का मामला अभी विचाराधीन है।
सरकार के संज्ञान में आया है कि प्रबंधन संबंधी अनिश्चितता के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान, नई नियुक्तियों, पदोन्नति तथा अन्य सेवा संबंधी मामलों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। इसका असर महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। छात्र संख्या में गिरावट और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए सरकार ने हस्तक्षेप का निर्णय लिया है।
इसके तहत अधिनियम की धारा 57 और 58 के अंतर्गत प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महाविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों को सुचारु बनाना तथा विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है।
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्तावित कार्रवाई पर आपत्तियां भी आमंत्रित की हैं। कोई भी व्यक्ति या संस्था निर्धारित तिथि से एक सप्ताह के भीतर सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को लिखित रूप में अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकता है। सरकार का कहना है कि इस पहल से महाविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के साथ सामान्य शैक्षणिक वातावरण बहाल करने में मदद मिलेगी।




