उत्तराखण्ड
महिलाओं की सुरक्षा और अधिकार संरक्षण के लिए राज्य महिला आयोग ने तैयार की नई कार्ययोजना

संवादसूत्र देहरादून। राज्य महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के संरक्षण को लेकर आगामी रणनीति तय की है। बुधवार को महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग निदेशालय में आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। साथ ही प्रदेश के सभी 13 जिलों के लिए नई कार्ययोजना तैयार की गई।
बैठक में महिला सुरक्षा, अधिकार संरक्षण, जनजागरूकता, आयोग की कार्यप्रणाली को मजबूत करने और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों से भी महिलाएं अपनी शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र लेकर आयोग तक पहुंच रही हैं। शिकायतों की बढ़ती संख्या को उन्होंने महिलाओं के बीच आयोग की पहुंच का संकेत बताया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला को समयबद्ध सहायता, विधिक परामर्श और न्याय दिलाना आयोग की जिम्मेदारी है। आयोग की ओर से महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी स्तर पर कार्य किया जाएगा।
बैठक में आयोग में 10 नए पद सृजित करने, सदस्यों के मानदेय में वृद्धि और स्वच्छता कर्मी के वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके अलावा सभी जिलों में आयोग की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उपाध्यक्षों को जिलावार जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके तहत ऐश्वर्या रावत को पौड़ी, टिहरी और रुद्रप्रयाग, चंद्रकला तिवारी को उत्तरकाशी और चमोली तथा शायरा बानो को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की जिम्मेदारी दी गई है।
आयोग के सदस्यों को अपने-अपने निर्धारित जिलों में नियमित जनसुनवाई, महिला जागरूकता कार्यक्रम, वन स्टॉप सेंटर के निरीक्षण और महिला अधिकार संरक्षण से जुड़े कार्यों का संचालन करना होगा। बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि उपाध्यक्ष और सदस्य संबंधित जिलों के वन स्टॉप सेंटर में आयोजित नियमित जनसुनवाई में शामिल होंगे।




