उत्तराखण्ड
भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश परियोजना पर एनएचएआई का स्पष्टीकरण, पर्यावरण संरक्षण को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता।

संवादसूत्र देहरादून: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण और वन संरक्षण संबंधी भ्रामक दावों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि परियोजना में आधुनिक सड़क अवसंरचना के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि वन क्षेत्र में राइट ऑफ वे को 60 मीटर से घटाकर 23 मीटर किया गया है तथा हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एलीफेंट अंडरपास, बॉक्स कल्वर्ट और पाइप कल्वर्ट जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
एनएचएआई के अनुसार, प्रतिपूरक वनीकरण, वन्यजीव राहत योजना और मिट्टी एवं जल संरक्षण योजनाओं के लिए ₹6.04 करोड़ से अधिक की राशि जमा की गई है। परियोजना के तहत 4,369 प्रभावित वृक्षों में से 754 वृक्षों का वैज्ञानिक तरीके से प्रत्यारोपण किया जाएगा। साथ ही ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, ‘नो हॉर्न’ जोन और वन्यजीव चेतावनी संकेतक जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं।
एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना में उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर वृक्षों की कटाई किए जाने संबंधी सोशल मीडिया और कुछ समाचारों में किए गए दावे तथ्यहीन हैं। प्राधिकरण के अनुसार, इस संबंध में दायर अवमानना याचिका को न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है और परियोजना का निर्माण सभी आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने तथा न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण पालन करते हुए किया जा रहा है।




