उत्तराखण्ड
अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य, इसे जनआंदोलन बनाएं: जे.पी. नड्डा।

संवादसूत्र देहरादून/हरिद्वार: देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आयोजित दधीचि अंगदान संकल्प अभियान की राष्ट्रीय संगोष्ठी में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य है, जिसके माध्यम से गंभीर रूप से जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से समझने की आवश्यकता है तथा जनभागीदारी से इसे व्यापक जनआंदोलन बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति त्याग, सेवा, समर्पण और परमार्थ की महान परंपरा पर आधारित है। महर्षि दधीचि और राजा शिवि के त्याग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी यदि किसी व्यक्ति का अंग किसी अन्य को जीवन दे सके, तो इससे बड़ा मानव कल्याण का कार्य नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य में अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। दून मेडिकल कॉलेज में राज्य का पहला सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र विकसित किया जा रहा है। साथ ही अंग प्रत्यारोपण केंद्रों, अंग बैंक और जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकारी एवं निजी अस्पतालों, प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है और राज्यों में भी संबंधित संस्थाओं को सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जागरूकता बढ़ने से देश में अंगदान के मामलों में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की समाज जागरण एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन में निभाई जा रही भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का संदेश “हम बदलेंगे तो युग बदलेगा” आज भी समाज को सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, सहयोग, कर्तव्यबोध और लोकमंगल की भावना का प्रतीक है। उन्होंने समाज के कल्याण के लिए समय, श्रम और संसाधनों के समर्पण को यज्ञ की वास्तविक भावना बताया।
संगोष्ठी में देशभर से आए चिकित्सकों, विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साधकों ने अंगदान के वैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विचार रखे। शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उपस्थित लोगों को अंगदान का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद, पद्मश्री नीलेश मांडलेवाला, डॉ. विजय धस्माना सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




