उत्तराखण्ड
केंद्रीय रेशम बोर्ड की पहल, रेशम उत्पादन में वैज्ञानिक तकनीकों और नवाचार पर जोर।

संवादसूत्र देहरादून: केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, सहसपुर में 21 से 25 अक्टूबर तक पांच दिवसीय प्रौद्योगिकी उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें श्री गुरु राम राय कॉलेज, देहरादून के 19 विद्यार्थियों और रेशम निदेशालय के 15 कर्मचारियों सहित कुल 34 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य रेशम उत्पादन की आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, अनुसंधान उपलब्धियों और उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देकर प्रतिभागियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाना था।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रेशमकीट प्रजनन, शहतूत की खेती, पौधरोपण एवं रखरखाव, वैज्ञानिक तरीके से रेशमकीट पालन, गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज उत्पादन और रोगों की पहचान एवं प्रबंधन की जानकारी दी गई। इसके साथ ही पालन गृहों और उपकरणों के विसंक्रमण, एकीकृत कृषि प्रणाली में रेशम उत्पादन की भूमिका तथा रेशम के कोयों की गुणवत्ता के मूल्यांकन से संबंधित तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का समन्वय वैज्ञानिक डॉ. साक्षी वैष्णव और डॉ. अरसाकुमार ई. ने केंद्र प्रमुख डॉ. पवन सैनी के मार्गदर्शन में किया। केंद्रीय रेशम बोर्ड के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. आबाद अहमद सिद्दीकी सहित विभिन्न इकाइयों के वैज्ञानिकों और केंद्र प्रभारियों ने विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, जम्मू की वैज्ञानिक डॉ. रुबिया बुखारी ने भी अतिथि वक्ता के रूप में अपने अनुभव साझा किए।
आदर्श रेशमकीट पालन गृह और ग्रोथ सेंटर का किया भ्रमण
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रेशम संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। उन्होंने कोया शिल्प निर्माण, शहतूत के पौधों की देखभाल, कोयों के नमूनाकरण, सुखाने, छंटाई और श्रेणीकरण सहित रेशमकीट बीज उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रतिभागियों ने केंद्रीय रेशम बोर्ड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग से स्थापित आदर्श रेशमकीट पालन गृह का भी भ्रमण किया। यहां नियंत्रित तापमान और आर्द्रता में रेशमकीट पालन की गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्हें आधुनिक पालन गृह की संरचना, पर्यावरण नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी गई।
इसके अलावा उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन लिमिटेड के अंतर्गत सेलाकुई स्थित ग्रोथ सेंटर का दौरा कराया गया। यहां प्रतिभागियों ने कोया प्रसंस्करण, रेशम धागा निकालने की प्रक्रिया और कोसोत्तर तकनीकों को समझा। इससे उन्हें कोया उत्पादन से रेशम धागा निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं की जानकारी मिली।
किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम में सैद्धांतिक व्याख्यानों, व्यावहारिक प्रशिक्षण और तकनीकी भ्रमण के माध्यम से शहतूत की खेती से लेकर रेशमकीट पालन, कोया उत्पादन और रेशम धागा निर्माण तक की संपूर्ण उत्पादन शृंखला की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के अंतिम दिन प्रतिभागियों से प्रतिक्रिया ली गई और सीखी गई तकनीकों को क्षेत्रीय स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। समापन अवसर पर प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न वितरित किए गए।
इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों को रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। वहीं, रेशम निदेशालय के कर्मचारियों को क्षेत्रीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान और किसानों तक आधुनिक तकनीकों का प्रसार करने के संबंध में उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई। आयोजन ने केंद्रीय रेशम बोर्ड, शैक्षणिक संस्थानों और राज्य रेशम निदेशालय के बीच तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा दिया।



