उत्तराखण्ड
टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को मुख्यमंत्री ने दिखाई हरी झंडी, 49 श्रद्धालुओं का जत्था रवाना।

संवादसूत्र देहरादून/चम्पावत: उत्तराखंड से संचालित कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ रविवार को टनकपुर से हुआ। ने शारदा पर्यटक आवास गृह से यात्रा के प्रथम दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और सभी श्रद्धालुओं की मंगलमय एवं सफल यात्रा की कामना की।

मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का रुद्राक्ष की माला और भगवान शिव का पटका पहनाकर स्वागत किया तथा कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव में अटूट आस्था ही यात्रा की कठिनाइयों को सरल बनाती है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा सीमांत क्षेत्रों के विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। श्रद्धालुओं से स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पाद खरीदकर सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्राचीन मंदिरों के पुनरुद्धार के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं।
प्रथम दल में चिकित्सक सहित कुल 49 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 34 पुरुष और 15 महिलाएं हैं। दल में देश के 13 राज्यों के श्रद्धालु शामिल हैं। तमिलनाडु के डॉ. अरुण कुमार चिकित्सक के रूप में दल के साथ हैं। राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल सबसे वरिष्ठ और गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा तीर्थयात्री हैं।
शनिवार शाम टनकपुर पहुंचे यात्रियों का छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार की व्यवस्थाओं की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से लगातार दूसरे वर्ष टनकपुर मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालित हो रही है, जिससे चम्पावत जिले में धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय व्यापार, परिवहन, होटल व्यवसाय और रोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के बीच प्रथम दल के रवाना होने से पूरे टनकपुर क्षेत्र में उत्सव और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल रहा।




