उत्तराखण्ड
खटीमा गोलीकांड के शहीदों को सीएम ने दी श्रद्धांजलि, कहा—बलिदान से मिला उत्तराखंड।

संवादसूत्र देहरादून/खटीमा, 1 सितंबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को खटीमा में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने खटीमा गोलीकांड के शहीद आंदोलनकारियों की प्रतिमाओं पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शहीदों के परिजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा गोलीकांड में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट और परमजीत सिंह सहित सभी अमर बलिदानियों को उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक सदैव याद रखेगा। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के कारण ही उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया है।
सीएम धामी ने अपने राज्य आंदोलन से जुड़े अनुभवों को याद करते हुए कहा कि खटीमा गोलीकांड ने पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन को नई दिशा दी और लोगों को अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खटीमा की धरती राज्य आंदोलन की तपोभूमि है और इसे आंदोलन की जननी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी घटनाओं में आंदोलनकारियों ने अपने रक्त से उत्तराखंड के इतिहास को लिखा। यह राज्य आसानी से या उपहार स्वरूप नहीं मिला, बल्कि इसके पीछे हजारों आंदोलनकारियों का संघर्ष, त्याग और बलिदान रहा है। राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप उत्तराखंड का निर्माण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आंदोलनकारियों के लिए आरक्षण और पेंशन का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के आदर्शों और सपनों को साकार करने के लिए निरंतर काम कर रही है। ‘उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के चिन्हित आन्दोलनकारियों या उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण अधिनियम, 2023’ के तहत पात्र राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों की मासिक पेंशन 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये की गई है। आंदोलन के दौरान घायल एवं जेल गए आंदोलनकारियों को 7 हजार रुपये, जबकि सक्रिय आंदोलनकारियों को 5,500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। चिन्हित आंदोलनकारियों को पहचान पत्र के साथ सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मातृशक्ति के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य के आंदोलन में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। महिलाओं ने आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और राज्य निर्माण के संघर्ष को मजबूती प्रदान की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के योगदान को देखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास और राज्यहित में कई महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। साथ ही, अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।
कार्यक्रम को सांसद अजय भट्ट, विधायक खटीमा भुवन कापड़ी और विधायक नानकमत्ता गोपाल सिंह राणा ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक रुद्रपुर शिव अरोरा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जाधारी राज्य मंत्री सुभाष बरथवाल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी, अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।




