उत्तराखण्ड
स्वास्थ्य कर्मियों को राहत से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन नीति तक: कैबिनेट के 8 बड़े फैसले।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखण्ड मंत्रिमंडल की बैठक में राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगी। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, औद्योगिक विकास, शिक्षा, जनजाति कल्याण, ऊर्जा और सामरिक सुरक्षा को मजबूती देने वाले कुल 8 अहम प्रस्तावों को कैबिनेट की मंजूरी मिली।
कैबिनेट ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को बड़ी राहत देते हुए निर्णय लिया कि जो कर्मी अपने मूल संवर्ग में न्यूनतम 5 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सम्पूर्ण सेवाकाल में एक बार आपसी सहमति के आधार पर जनपद परिवर्तन की अनुमति दी जाएगी।
औद्योगिक और आधारभूत ढांचे के विकास को गति देने के उद्देश्य से राज्य में लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि प्राप्ति की प्रक्रिया तय की गई है। इससे भूमि अर्जन में लगने वाला समय कम होगा, मुकदमेबाजी घटेगी और परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी।
उधमसिंहनगर जनपद स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को लेकर जारी शासनादेश में संशोधन को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसके तहत सिडकुल को आवंटित भूमि पर समान प्रयोजन हेतु उप-पट्टा (Sub-Lease) देने की अनुमति दी गई है, जिससे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
जनजाति बहुल जिलों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देहरादून, चमोली, ऊधमसिंहनगर और पिथौरागढ़ में 4 जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित किए गए हैं। इसके लिए सेवा नियमावली में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई है।
राज्य में भू-जल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाने के लिए गैर-कृषि उपयोग हेतु भू-जल निकासी पर जल मूल्य/प्रभार की दरें तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया है। वाणिज्यिक, औद्योगिक और रेजीडेंशियल अपार्टमेंट/ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के लिए ₹5000 पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय” की स्थापना को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। यह विश्वविद्यालय नवाचार, शोध और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर केंद्रित रहेगा।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तरकाशी की चिन्यालीसौड़ और चमोली की गौचर हवाई पट्टियों को नागरिक एवं सैन्य संचालन हेतु एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में रक्षा मंत्रालय को लीज पर सौंपने को स्वीकृति दी गई है।
इसके साथ ही राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए “उत्तराखण्ड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026” के प्रख्यापन को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली। यह नीति जल विद्युत जैसे प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से हरित हाइड्रोजन उत्पादन, रोजगार सृजन और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगी।




