उत्तराखण्ड
स्वास्थ्य नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में आईआईटी रुड़की की बड़ी पहल।

संवादसूत्र देहरादून/रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने किफ़ायती स्वास्थ्य सेवा, महामारी की तैयारी तथा स्वदेशी जैवप्रौद्योगिकी नवाचार को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान द्वारा अगली पीढ़ी का एंटीबॉडी खोज मंच विकसित किया गया है, जिसमें राष्ट्रीय एवं वैश्विक महत्व की बीमारियों के लिए निदान और उपचारों को रूपांतरित करने की व्यापक क्षमता निहित है।
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किया गया यह अनुसंधान अति-विशाल, उच्च-विविधता एकल-डोमेन एंटीबॉडी (नैनोबॉडी) लाइब्रेरी के विकास पर आधारित है। यह मंच संक्रामक रोगों, कैंसर, स्वप्रतिरक्षी विकारों तथा उभरते रोगजनकों सहित अनेक लक्ष्यों के विरुद्ध अत्यधिक स्थिर एवं उच्च-आसक्ति एंटीबॉडी की तीव्र पहचान को सक्षम बनाता है। खोज की समयसीमा में उल्लेखनीय कमी लाकर यह नवाचार सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।
आईआईटी रुड़की के जैवविज्ञान एवं जैवअभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर राजेश कुमार ने कहा,
“यह अनुसंधान समाजोपयोगी विज्ञान के प्रति आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। देश के भीतर एक सार्वभौमिक, उच्च-विविधता एंटीबॉडी खोज प्रणाली विकसित कर हम त्वरित रोग प्रतिक्रिया की राष्ट्रीय क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहे हैं तथा किफ़ायती निदान एवं उपचारों के विकास को गति दे रहे हैं।”
यह अनुसंधान संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों—विशेष रूप से एसडीजी-3 (अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण), एसडीजी-9 (उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना) और एसडीजी-17 (लक्ष्यों के लिए साझेदारियाँ)—के साथ सुदृढ़ रूप से संरेखित है। यह निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ समय पर और लागत-प्रभावी स्वास्थ्य समाधानों की उपलब्धता एक निरंतर चुनौती बनी हुई है।
यह पहल भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी प्रमुख प्राथमिकताओं को भी सशक्त करती है, क्योंकि यह स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ावा देती है, बौद्धिक संपदा के सृजन को प्रोत्साहित करती है तथा आयातित जैविक उत्पादों पर निर्भरता को कम करती है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर के. के. पंत ने कहा,
“यह उपलब्धि दर्शाती है कि किस प्रकार मौलिक अनुसंधान, अनुवादात्मक दृष्टिकोण और उद्योग सहयोग मिलकर समकालीन सामाजिक चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। आईआईटी रुड़की जिम्मेदार एवं प्रभावशाली स्वास्थ्य नवाचार के माध्यम से भारत को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
वास्तविक उपयोग और त्वरित परिनियोजन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, आईआईटी रुड़की ने आईएमजीनएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के अंतर्गत एंटीबॉडी अभियांत्रिकी, निदान, उपचार, जैवप्रसंस्करण विकास तथा उन्नत जैविक उत्पादों के सह-विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
आईएमजीनएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा,
“आईआईटी रुड़की के साथ यह सहयोग अकादमिक अनुसंधान और औद्योगिक विकास की पूरक क्षमताओं को एक मंच पर लाता है, जिससे अगली पीढ़ी की एंटीबॉडी प्रौद्योगिकियों को मापनीय एवं किफ़ायती स्वास्थ्य समाधानों में परिवर्तित किया जा सकेगा।”




