उत्तराखण्ड
भूमि फर्जीवाड़े पर बड़ा शिकंजा: 24 मामलों में FIR के निर्देश, 45 निस्तारित।

संवादसूत्र देहरादून: मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में कुल 125 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें 45 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि 24 मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में सामने आया कि सबसे ज्यादा 74 मामले देहरादून जिले से हैं, जबकि हरिद्वार से 15, पौड़ी गढ़वाल से 13, टिहरी गढ़वाल से 2 और चमोली से 1 मामला शामिल है।
सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले फर्जीवाड़े सामने आए—जैसे बिना जमीन के ही बिक्री, खसरा नंबर में हेरफेर कर दूसरी जमीन बेचना, और 2 बीघा को 4 बीघा बताकर बेच देना। कई मामलों में जमीन पर अवैध कब्जा और तारबाड़ कर कब्जे की शिकायतें भी मिलीं।
आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि भूमि धोखाधड़ी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गंभीर मामलों में तुरंत पुलिस कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बड़े भू-प्रकरणों में देरी पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर ठोस प्रगति लाने को कहा गया है।
कुछ मामलों में आपसी समझौते और प्रशासनिक हस्तक्षेप से समाधान हुआ, जबकि जो मामले न्यायालय में लंबित हैं, उनका निस्तारण विधिक प्रक्रिया से ही होगा।
आयुक्त का साफ संदेश है—भूमि से जुड़े मामलों को लंबित न रखा जाए और जहां भी धोखाधड़ी स्पष्ट हो, वहां तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।




