उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के 6 वेब पोर्टल किए लॉन्च, अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी।

संवादसूत्र देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में राजस्व परिषद द्वारा राजस्व विभाग के विभागीय कार्यों से संबंधित 6 वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। इनमें ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन), भू-नक्शा, भूलेख अंश, भू-अनुमति, एग्री लोन तथा ई-वसूली (ई-आरसीएस) पोर्टल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप विज्ञान, आईटी और एआई के माध्यम से आमजन को अधिक से अधिक सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। इन वेब पोर्टलों के शुभारंभ से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी, उनका जीवन सरल होगा और उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान और निस्तारण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत राजस्व से जुड़ी सेवाओं का ऑनलाइन उपलब्ध होना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी और नागरिक घर बैठे खतौनी सहित अन्य राजस्व संबंधी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि अभिलेखों से संबंधित सेवाओं में अब खतौनी तहसील कार्यालय जाने के बजाय मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से सत्यापित प्रति के रूप में ऑनलाइन भुगतान कर प्राप्त की जा सकती है। प्रदेश में उद्योग एवं कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि उपयोग अथवा भूमि कार्य की अनुमति प्रक्रिया को भी पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया गया है। साथ ही भूमि मानचित्र (कैडस्ट्रल मैप) को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 6 वेब एप्लीकेशनों के नवीन संस्करण डिजिटल इंडिया की भावना, विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्यों के अनुरूप आधुनिक तकनीकों के माध्यम से विकसित किए गए हैं। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ-साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को भी बढ़ावा मिलेगा।
गौरतलब है कि ई-भूलेख पोर्टल के माध्यम से खतौनी की सत्यापित प्रति अब ऑनलाइन नियत शुल्क का भुगतान कर प्राप्त की जा सकती है। भूलेख अंश पोर्टल के तहत संयुक्त खातेदारी एवं गोल खातों में दर्ज खातेदारों और सह-खातेदारों के पृथक अंश का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
भू-अनुमति पोर्टल के माध्यम से उद्योग एवं कृषि प्रयोजनों हेतु भूमि उपयोग की अनुमति प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल किया गया है। एग्री लोन पोर्टल के तहत किसान अपनी भूमि के सापेक्ष कृषि एवं संबंधित गतिविधियों के लिए बैंक ऋण हेतु ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ऋण अदायगी के बाद बैंक द्वारा एनओसी जारी होते ही स्वतः चार्ज रिमूव हो जाएगा।
ई-वसूली पोर्टल के जरिए राजस्व वसूली की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है, जिससे वसूली की प्रत्येक अवस्था पर ट्रैकिंग संभव होगी। वहीं भू-नक्शा पोर्टल के तहत भूमि मानचित्र को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा दी गई है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव राजस्व एस.एन. पांडेय, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरु सहित संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।




