उत्तराखण्ड
भीषण गर्मी में बढ़ी बिजली मांग, राज्य में निर्बाध आपूर्ति के निर्देश।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और हीट वेव के कारण बिजली की मांग में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है, ऐसे में आगामी दिनों की जरूरतों को देखते हुए पर्याप्त विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
बैठक में यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जी.एस. बुधियाल ने बताया कि 21 मई 2026 को पूरे देश में बिजली की अधिकतम मांग 270.8 गीगावाट दर्ज की गई, जो मई 2024 के 250 गीगावाट के पुराने रिकॉर्ड से अधिक है। वहीं उत्तराखंड में भी इसी दिन अब तक की सर्वाधिक 2982 मेगावाट बिजली मांग दर्ज की गई।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर और मध्य भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के उपयोग में तेजी आई है, जिससे बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके बावजूद यूपीसीएल द्वारा प्रभावी विद्युत प्रबंधन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ग्रिड समन्वय के जरिए प्रदेश में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बैठक में बताया गया कि बढ़ती मांग के बावजूद 28 मई 2026 तक प्रदेश में किसी प्रकार की रोस्टरिंग नहीं की गई है। साथ ही ऊर्जा एक्सचेंजों के माध्यम से 1 से 15 मई तक 100 मेगावाट तथा 16 से 31 मई तक 225 मेगावाट अग्रिम विद्युत की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड को केंद्रीय पूल से आवंटित 250 मेगावाट के अतिरिक्त 150 मेगावाट बिजली और उपलब्ध कराई गई है, जिससे राज्य को बड़ी राहत मिली है।
हालांकि पिछले कुछ दिनों में पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा और हिमपात के कारण जल विद्युत उत्पादन में लगभग 4 मिलियन यूनिट की कमी आई है, लेकिन आगामी दिनों में इसके बढ़ने की संभावना जताई गई है।
बैठक में आम उपभोक्ताओं से अपील की गई कि वे शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक के पीक आवर्स में बिजली का संयमित और किफायती उपयोग करें तथा अधिक बिजली खपत वाले उपकरणों का उपयोग कम से कम करें।




