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जनभागीदारी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर हुआ व्यापक मंथन।

उत्तराखण्ड

जनभागीदारी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर हुआ व्यापक मंथन।

संवादसूत्र देहरादून/चम्पावत: एनएचपीसी बनबसा सभागार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित बजट-पूर्व संवाद कार्यक्रम में राज्य के समग्र विकास, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था, जनभागीदारी और संतुलित विकास को केंद्र में रखते हुए व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मुख्यमंत्री मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया। संवाद के दौरान सचिव वित्त दिलीप जावलकर ने राज्य की आर्थिक प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पाँच वर्षों में उत्तराखण्ड का कैपिटल आउटले ₹7,534 करोड़ से बढ़कर ₹14,765 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में राज्य की जीडीपी ₹2.54 लाख करोड़ से बढ़कर ₹4.74 लाख करोड़ तक पहुँच गई है, जो लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
संवाद में जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों, विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों से आए हितधारकों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
ग्रामीण विकास के लिए अनुदान बढ़ाने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवर लाइन एवं शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने और जिला पंचायत सदस्यों के लिए मानदेय व्यवस्था जैसे सुझाव सामने आए।
शहरी विकास के तहत नगर निकायों के बजट में वृद्धि, सोलर पैनल स्थापना, सड़कों-नालियों के बेहतर रखरखाव तथा रजिस्ट्री शुल्क का हिस्सा नगर निकायों को देने की मांग रखी गई।
कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में बागवानी, वैल्यू क्रॉप्स, कीवी-ब्लूबेरी जैसे फलों के उत्पादन को बढ़ावा, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, तकनीकी प्रशिक्षण तथा फल उत्पादन सब्सिडी को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत किए जाने के सुझाव दिए गए।
उद्योग विकास में पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापना, एमएसएमई को वित्तीय सहायता, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा और स्थानीय रोजगार सृजन पर जोर दिया गया।
महिला सशक्तिकरण के लिए प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र, ब्याज-मुक्त ऋण और सार्वजनिक सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता देने के सुझाव रखे गए।
पर्यटन क्षेत्र में हेली सेवा विस्तार, सस्टेनेबल टूरिज्म, नेचर टूरिज्म, ट्रैकिंग, छोटे पर्यटन स्थलों के विकास और एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक गांव में पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाओं की दिशा में कार्य करेगी। उन्होंने वर्ष 2047 तक उत्तराखण्ड को आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वित्तीय प्रबंधन में उत्तराखण्ड ने देश में अग्रणी स्थान बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट राज्य की दिशा तय करता है और जनभागीदारी से ही इसे प्रभावी बनाया जा सकता है। प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट में यथासंभव सम्मिलित किया जाएगा, ताकि राज्य का समावेशी, संतुलित और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में कुमाऊँ मंडल के आयुक्त, जिलाधिकारी चम्पावत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, नगर निकाय अध्यक्ष, पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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