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टीईटी पर फंसा शिक्षकों का भविष्य, समाधान तलाश रही सरकार।

उत्तराखण्ड

टीईटी पर फंसा शिक्षकों का भविष्य, समाधान तलाश रही सरकार।

संवादसूत्र देहरादून। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कक्षा 1 से 8 तक के सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद उत्तराखंड में 10 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि सेवारत शिक्षक टीईटी किस प्रक्रिया के तहत देंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर उनकी पदोन्नति और नौकरी पर प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन वर्तमान में आयोजित होने वाली टीईटी परीक्षाओं के आवेदन प्रारूप में कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से कोई श्रेणी या व्यवस्था नहीं है।

इसी वजह से हाल ही में वर्ष 2010 से पहले नियुक्त कुछ शिक्षकों द्वारा सीटीईटी के लिए गलत विवरण देकर आवेदन करने का मामला सामने आया था। बताया गया कि बीएड धारक शिक्षकों ने स्वयं को डीएलएड या विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षित दर्शाकर आवेदन किया था। बाद में विभाग ने ऐसे मामलों को देखते हुए जारी एनओसी को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया।

शिक्षा मंत्री ने इस विषय पर अधिकारियों और शिक्षक संगठनों के साथ बैठकें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है। सरकार कानूनी राय लेने के साथ-साथ एनसीईआरटी से भी सुझाव प्राप्त करने पर विचार कर रही है।

शिक्षकों के सामने प्रमुख सवाल

  • कार्यरत शिक्षक टीईटी कब और किस प्रक्रिया से देंगे?
  • क्या उनके लिए अलग या विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित होगी?
  • क्या परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर और प्रशिक्षण मिलेगा?
  • पदोन्नति और सेवा सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था होगी?
  • क्या राज्य सरकार टीईटी से छूट के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजेगी?

शिक्षक संगठनों की मांगें

शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जानी चाहिए। यदि छूट संभव न हो तो कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी सत्र आयोजित किए जाएं, आवेदन प्रक्रिया में बदलाव किया जाए तथा तैयारी के लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।

प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय तदर्थ समिति सदस्य मनोज तिवारी के अनुसार, इस मुद्दे पर 18 जून को शिक्षक भवन में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय होगी। इसके बाद 22 जून को शिक्षक सचिवालय कूच करने की भी योजना है।

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षकों के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, लेकिन यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है, इसलिए इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। सरकार सभी कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी।

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